



आयकर विभाग ने टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी राहत की तैयारी की है। 1 अप्रैल से लागू होने वाले इनकम टैक्स एक्ट 2025 (Income Tax Act, 2025) से पहले विभाग ने ड्राफ्ट नियम जारी कर टैक्स फॉर्म्स की नंबरिंग पूरी तरह बदलने का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद आईटीआर फाइलिंग को आसान बनाना, कन्फ्यूजन घटाना और कंप्लायंस को ज्यादा व्यवस्थित करना है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि वर्षों में अलग-अलग समय पर जुड़े फॉर्म नंबरों की वजह से दोहराव और भ्रम पैदा हो गया था। नई नंबरिंग से रिपोर्टिंग को रियल-टाइम डेटा मैचिंग और एनालिटिक्स से बेहतर जोड़ा जा सकेगा। हालांकि, कंपनियों, नियोक्ताओं, टैक्स प्रोफेशनल्स और आईटी सिस्टम्स को अपने सॉफ्टवेयर जल्दी अपडेट करने होंगे।
क्या-क्या होंगे बदलाव?
टैक्स ऑडिट रिपोर्ट: अभी के Form 3CA, 3CB, 3CD अब मिलकर Form 26 बनेंगे।
ट्रांसफर प्राइसिंग ऑडिट: Form 3CEB → Form 48 बनेगा।
MAT सर्टिफिकेशन: Form 29B → Form 66 के नाम से जाना जाएगा।
MAT यानी बुक प्रॉफिट पर 15% टैक्स (धारा 115JB), जब सामान्य टैक्स इससे कम हो।
टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट: Form 10FA → Form 42 बनेगा।
DTAA डिस्क्लोजर: Form 10F → Form 41 हो जाएगा।
TDS/TCS फॉर्म किस नाम से बदलेंगे?
कम या शून्य TDS आवेदन: Form 128
सैलरी TDS सर्टिफिकेट: Form 130
तिमाही TDS रिटर्न:
24Q → Form 138 (सैलरी)
26Q → Form 140 (रेजिडेंट्स)
27Q → Form 144 (नॉन-रेजिडेंट्स)
TCS रिटर्न: 27EQ → Form 143
रिपोर्टिंग फॉर्म को भी मिली नई पहचान
सालाना टैक्स स्टेटमेंट 26AS → Form 168 के नाम से जाना जाएगा।
स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस 61A → Form 165 होगा।
विदेशी रेमिटेंस डिक्लेरेशन 15CA → Form 145 बनेगा।
CA सर्टिफिकेट फॉर रेमिटेंस 15CB → Form 146 के नाम से बदलेगा।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इन बदलावों से रिटर्न फाइलिंग सरल होगी, आय और परक्विजि की वैल्यूएशन स्पष्ट होगी और कंप्लायंस ढांचा ज्यादा मानकीकृत बनेगा। शुरुआती दौर में सिस्टम अपडेट की चुनौती रहेगी, लेकिन लंबे समय में टैक्सपेयर्स और प्रोफेशनल्स, दोनों के लिए प्रक्रिया ज्यादा साफ और तेज हो जाएगी।


