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देश व विदेश में संत कबीर के विचारों को पंहुचाने का कार्य किया जाएगा : विधानसभा अध्यक्ष डाॅ महंत, आमनदुला में कबीर संत समागम समारोह एवं सात्विक चौका आरती का आयोजन

जांजगीर-चांपा. छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डाॅ. चरणदास महंत ने कहा कि लोगों की विकृत हो रही सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाने और प्रदेश, देश और संपूर्ण मानव समाज में मानवीय संवेदनशील और सद्गुणों के विकास के लिए संत कबीर के विचारों को अनुकरण किया जाना आवश्यक हैै। आज विश्वशांति के लिए कबीर के उपदेशों को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश, विदेश में संत कबीर के विचारों को पंहुचाने का काम छत्तीसगढ़ की सरकार करेगी।
वे मालखरौदा विकासखण्ड के ग्राम आमनदुला में आयोजित सद्गुरू संत समागम समारोह को संबोधित कर रहे थे। डाॅ महंत ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आज कबीर के विचारों और उनके संस्कारों की सरकार है। सीएम भूपेश बघेल, संत कबीर के विचारों व आदर्शो कों मानने वाले मुख्यमंत्री हैं। वे आमजन के प्रति स्नेह व प्रेमभाव रखते हैं। उन्होंने कहा कि नरवा, घुरवा, गरवा और बाड़ी योजना हमारी आर्थिक संस्कृति और धरोहर है। जो संत कबीर के आदर्शों व विचारों से प्रेरित योजना है। उन्होंने कहा कि समदर्शी भाव से सभी के विकास का कार्य कर रही है, ताकि छत्तीसगढ़ में कबीर के विचारों और सोच का साम्राज्य स्थापित हो। डाॅ महंत ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा उन्हें विशेष रूप से शामिल होने के लिए भेजा गया है। उन्होंने उपस्थित लोगो को मुख्यमंत्री के संदेश से अवगत कराया। मानव समाज के लिए संत कबीर समागम का महत्व बताते हुए डाॅ महंत ने कहा कि जिस प्रकार बसंत ऋतु के आगमन से प्रकृति सौंदर्य का नया स्वरूप प्राप्त करती है। उसी प्रकार संत कबीर समागम से आम लोगों में मानवीय गुणों प्रेमभाव और सकारात्मक सोच का निर्माण होता है। उन्होंने समागम में उपस्थित संतो का प्रणाम करते हुए आशीर्वाद की कामना की।
दामाखेड़ा के धर्मगुरू प्रकाश मुनि साहेब ने इस अवसर पर कहा कि सौ बरस पहले पधारे संतकबीर दास जी के समय देश में अनेक महान संत हुए। किंतु संत कबीर जी को शिरोमणी संत कहा गया। उन्होंने कहा कि सभी संत पूज्यनीय होते हैं किंतु संत कबीर सभी संतो में एक निराले संत थे। वे मानव समाज के सजग प्रहरी थे। वे मानव समाज को सूक्ष्म दृष्टि से देखते थे। वे विषमता से देखने वालो का विरोध करते थे। कबीर ने सभी धर्माें के लोगो को मानवता का पाठ पढ़ाया और उन्हंे संवेंदनशीलता का उपदेश दिया। भेदभाव वे पसंद नहीं करते थे। उन्होंने मानव समाज को समरसता का संदेश दिया। संत कबीर ने मनुष्यों के बीच की खाई को पाटने का प्रयास किया। संत राजेश्री महंत रामसुंदर दास ने कहा कि कबीर संत समागम एक सुखद अवसर है। उन्होंने कहा कि तीन दिवसीय सतंसंग कार्यक्रम की तरह अन्य स्थानों पर भी कार्यक्रम का आयोजन होते रहना चाहिए। उन्होने कहा कि जिस स्थान व मंच पर धर्मगुरू आसीन रहते हैं, वह अलौकिक होता है। उन्होंने कबीर के दोहे का वाचन करते हुए उनका अर्थ बताया और जीवन में वह किस प्रकार महत्वपूर्ण है, इसकी जानकारी दी। उन्होंने आमनदुला के संतसमागम में अपनी उपस्थिति को सौभाग्यपूर्ण निरूपित किया। इस अवसर पर चन्द्रपुर विधायक रामकुमार यादव, कलेक्टर जेपी पाठक, जिला पंचायत सीईओ तीर्थराज अग्रवाल, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में कबीर पंथ के अनुयायी उपस्थित थे।

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