प्लास्टिक बीनने वाली महिलाओं ने जीती 10 करोड़ की लॉटरी, 25-25 रूपये जोड़कर खरीदा था टिकट, जानिए फिर क्या हुआ कमाल..

केरल: बदनसीबी की तरह खुशनसीबी भी इंसान के दरवाजे पर कब दस्तक दें जाएँ कह पाना मुश्किल हैं। तमाम कोशिशों के बीच एक दिन ऐसा जरूर आता हैं जब हर किसी की स्याह किस्मत चमक उठती हैं। कुछ इसी तरह से किस्मत चमकी हैं केरल के महिलाओं की।



वो भी ऐसी महिलायें जो कचरे से प्लास्टिक बीनने का काम करती हैं। इनके हाथ ऐसा जैकपॉट लगा है जो इनकी पूरी जिंदगी को संवार देंगी। दरअसल केरल के मलप्पुरम के नगरपालिका की कचरे से प्लास्टिक अलग करने वाली यूनिट से जुड़ी 25 महिला मजदूरों ने 25-25 रुपये इकट्ठा कर 250 रुपये का लॉटरी टिकट खरीदा था इसके बाद इनकी किस्मत ने ऐसी पलटी मारी कि उन्हें लाखों का नहीं बल्कि करोड़ो का लॉटरी टिकट लग गया। उन्होंने दस करोड़ रुपये की राशि जीत ली।

इसे भी पढ़े -  WhatsApp से होगी छप्परफाड़ कमाई! अब चैनल पर कंटेंट डालने के मिलेंगे पैसे, नए फीचर की चल रही टेस्टिंग

अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इसी बुधवार को 11 महिलाएं अपने फीके हरे रंग के ओवरकोट, रबर के दस्ताने पहने हुए थीं और परप्पनांगडी नगरपालिका गोदाम में घरों से एकत्र किए गए प्लास्टिक कचरे को अलग कर रही थीं, तभी उन्हें 10 करोड़ रुपये का जैकपॉट जीतने की खबर मिली। केरल लॉटरी विभाग ने घोषणा की कि पैसे इकट्ठा करने के बाद महिलाओं ने लॉटरी टिकट खरीदा था क्योंकि उनमें से कोई भी 250 रुपये का टिकट अकेले खरीदने में सक्षम नहीं था। इस लॉटरी के जरिए उन्होंने मानसून बम्पर के तहत 10 करोड़ रुपये जीत लिए हैं। लॉटरी विजेताओं से मिलने और उन्हें बधाई देने के लिए गुरुवार को बड़ी संख्या में लोग नगर निगम गोदाम परिसर में जुटे।

इसे भी पढ़े -  पहली बार पाकिस्तान का दौरा करेगी ये क्रिकेट टीम, वनडे और टी20 सीरीज में लेगी हिस्सा; दर्शकों के बिना होंगे मैच!

विजेताओं में से एक महिला राधा ने कहा, “उत्साह और खुशी की कोई सीमा नहीं थी जब हमें आखिरकार पता चला कि हमने जैकपॉट जीत लिया है। हम सभी जीवन में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं और पैसा हमारी समस्याओं को हल करने के लिए कुछ हद तक राहत देगा।”

परप्पानांगडी नगर पालिका की ओर से शुरू किए गए हरित पहल के तहत गठित हरित कर्म सेना के साथ काम करने वाली महिलाओं को 7,500 रुपये से 14,000 रुपये वेतन मिलता है। हरित कर्म सेना घरों और प्रतिष्ठानों से गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे के संग्रह का काम करती है, जिसे रीसाइक्लिंग के लिए श्रेडिंग इकाइयों में भेजा जाता है।

इसे भी पढ़े -  IAS Anurag Yadav कौन हैं? ज‍िनकी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से हुई बहस

error: Content is protected !!