जब लाल बहादुर शास्त्री सबके सामने मीना कुमारी से मांगनी पड़ी थी माफी, पूर्व प्रधानमंत्री से हो गई थी ये गलती बेहद दिलचस्प है ये किस्सा

नई दिल्ली: मीना कुमारी, भारतीय सिनेमा का एक ऐसा नाम जिनकी खूबसूरती और अदायगी की उपमा आज तक दी जाती है. 1 अगस्त 1932 को जन्मीं मीना कुमारी ने अपने छोटे से एक्टिंग करियर में अपनी बहुत बड़ी पहचान बनाई. मीना को उनकी कमाल के अभिनय की वजह से ट्रेजेडी क्वीन का नाम दिया गया. खूबसूरती की बात करें तो कल ही नहीं आज भी उनके आगे बॉलीवुड की हसीनाएं नहीं टिकती. ऐसी मीना कुमारी को एक बार पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री नहीं पहचान पाए थे और बाद में उन्हें इसके लिए माफी भी मांगनी पड़ी थी. आइए आपको ये दिलचस्प किस्सा विस्तार से बताते हैं.



इसे भी पढ़े -  Sakti News : कलमी गांव में युवा समिति के द्वारा आयोजित KPL प्रीमियर लीग क्रिकेट प्रतियोगिता का हुआ समापन, फाइनल मुकाबले में कचन्दा की टीम ने ट्रॉफी के साथ 51 हजार रुपये जीती, मालखरौदा जनपद पंचायत अध्यक्ष कवि वर्मा, जनपद सदस्य जितेंद्र बहादुर सिंह, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि एकलव्य चंद्रा हुए शामिल

कुलदीप नैयर की किताब ‘ऑन लीडर्स एंड आइकॉन्स : फ्रॉम जिन्नाह टू मोदी’ में इस दिलचस्प किस्से का जिक्र है. इसके अनुसार फिल्म पाकीजा की शूटिंग चल रही थी, तब महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने शास्त्री जी को फिल्म की शूटिंग देखने के लिए आमंत्रित किया. शास्त्री जी, नहीं जाना चाहते थे, लेकिन बहुत जिद करने के बाद वह शूटिंग के लिए पहुंचे.

स्टूडियो में पहुंचने पर शास्त्री जी का भव्य स्वागत हुआ और खुद मीना कुमारी ने उन्हें माला पहनाई और उन्हें नमस्कार किया. लेकिन शास्त्री जी, मीना कुमारी को पहचान नहीं पाए और बड़ी ही विम्रनता के साथ पूछा कि ये महिला कौन हैं. बाद में शास्त्री को मीना के बारे में बताया गया. तब सार्वजनिक तौर पर मंच से शास्त्री जी ने कहा, मीना कुमारी जी मुझे माफ करिएगा, मैंने आपका नाम पहले नहीं सुना था.

इसे भी पढ़े -  Sakti News : कलमी गांव में युवा समिति के द्वारा आयोजित KPL प्रीमियर लीग क्रिकेट प्रतियोगिता का हुआ समापन, फाइनल मुकाबले में कचन्दा की टीम ने ट्रॉफी के साथ 51 हजार रुपये जीती, मालखरौदा जनपद पंचायत अध्यक्ष कवि वर्मा, जनपद सदस्य जितेंद्र बहादुर सिंह, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि एकलव्य चंद्रा हुए शामिल

बताया जाता है कि फिल्म की शूटिंग के दौरान मीना काफी दर्द से गुजर रही थी. फिल्म फरवरी 1972 में रिलीज हुई और मीना की तबीयत बिगड़ती चली गई. इसके बाद 31 मार्च 1972 को मीना ने दम तोड़ दिया. लेकिन उनकी फिल्म पाकीजा इतिहास बन गई और मीना की तरह अमर हो गई.

error: Content is protected !!