गरीब जेल में रह जाते हैं, अमीरों को मिल जाती है जमानत; सुप्रीम कोर्ट जज ने जताई निराशा. पढ़िए…

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संजय किशन कौल ने न्याय व्यवस्था की मौजूदा स्थिति पर निराशा जाहिर की है। उनका कहना है कि कई गरीब सलाखों के पीछे सिर्फ इसलिए रह जाते हैं, क्योंकि वे खर्च नहीं उठा सकते। जबकि, वकील करने में सक्षम अमीरों को जमानत मिल जाती है। इस दौरान उन्होंने जेलों में सालों से बंद विचाराधीन कैदियों के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया।

 



 

 

 

जस्टिस कौल ने कहा कि गरीब और अशिक्षितों को हिरासत में लिए जाने की संभावनाएं ज्यादा होती हैं। उन्होंने कहा, ‘न्यायाधीशों के तौर पर हमारी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि कानून का पालन और उनके साथ इस आधार पर भेदभाव न हो कि वे किस स्तर के वकील की सहायता ले पा रहे हैं।’

इसे भी पढ़े -  Akaltara News : राष्ट्रीय सेवा योजना स्थापना दिवस पर स्वयंसेवकों ने दिया राष्ट्र निर्माण का संदेश, अकलतरा आईसेक्ट सेंटर में गूंजा स्वच्छता का संदेश, स्वयंसेवकों की रैली ने जीता सबका दिल, सेवा संकल्प अभियान में सृजन की झलक, छात्र-छात्राओं ने कबाड़ से गढ़ा कमाल...

 

 

 

 

इस अभियान के तहत उन कैदियों की पहचान और समीक्षा करना है, जिनकी रिहाई पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विचाराधीन कैदियों को लंबे समय तक रखे जाने की बात डराने वाली है। उन्होंने कहा कि इसे लेकर कोई भी अपनी आंखें बंद नहीं कर सकता। जस्टिस कौल ने कहा कि गरीब कैदियों को लगातार हिरासत में रखे जाने का असर उनपर और उनके परिवार पर पड़ता है।

इसे भी पढ़े -  Akaltara News : श्री ऋषभ विद्योदय महाविद्यालय बनाहिल में हिन्दी साहित्य के राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्म जयंती पर "भारत में संपर्क भाषा के रूप में हिन्दी चुनौतियां और संभावनाएं" विषय पर संगोष्ठी कार्यक्रम आयोजित

 

 

 

जस्टिस कौल ने कहा कि जेल में बंद ऐसे विचाराधीन कैदियों का मुद्दा न्यायपालिका के सामने उठता रहा है, जो रिहाई की समीक्षा किए जाने के योग्य हैं। इस दौरान उन्होंने न्याय व्यवस्था से गरीबों की मदद की भी अपील की और कहा कि वे कानूनी सहायता में लगने वाला खर्च नहीं उठा सकते।
उन्होंने कहा, ‘आज हिरासत को विकास के संदर्भ में देखा जा रहा है। दोष सिद्ध होने से पहले हिरासत में रखे जाना आपराधिक न्याय संसाधनों को भटका देता है और आरोपियों और उनके परिवारों पर बोझ डालता है।’

इसे भी पढ़े -  Rahod News : सीताराम कश्यप कॉलेज ऑफ फार्मेसी में विश्व फार्मासिस्ट दिवस 2026 पर अतिथियों ने फार्मासिस्टों की भूमिका और स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान पर दिया संदेश

Related posts:

error: Content is protected !!