सक्ती. बैलेट पेपर का नाम लेकर देश की चुनाव व्यवस्था पर बार-बार सवाल उठाने वाली कांग्रेस को अब बैलेट पेपर से हुए चुनावों में भी करारी हार का सामना करना पड़ा है. उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक की विधान परिषद (MLC) सीटों के परिणामों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कांग्रेस को जनता पूरी तरह से नकार चुकी है.








लोकेश साहू ने कहा कि हाल ही में हुए चुनावों में कांग्रेस का इन राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों पर खाता तक नहीं खुला. सबसे बड़ा आश्चर्य यह है कि कर्नाटक में खुद कांग्रेस की अपनी सरकार होने के बावजूद पार्टी एक भी सीट जीतने में नाकामयाब रही.
उन्होंने आगे कहा कि जब ईवीएम (EVM) पर सवाल उठे थे, तब कांग्रेस ने बैलेट पेपर की पुरज़ोर वकालत की थी. अब जब बैलेट पेपर से हुए चुनाव में भी जनता ने उसे खारिज कर दिया है, तो पार्टी यह बताए कि वह अपनी इस हार का ठीकरा किसके सिर फोड़ेगी?
राजनीति में हार का ठीकरा कभी चुनाव आयोग पर, कभी चुनाव प्रक्रिया पर और कभी पूरी व्यवस्था पर फोड़ने से ज़मीनी सच्चाई नहीं बदल जाती. लोकतंत्र में जनता जो जनादेश देती है, हर राजनीतिक दल को उसे खुले मन से स्वीकार करना चाहिए, न कि बार-बार जनता के निर्णय का अनादर करना चाहिए.
समय आ गया है कि कांग्रेस आत्ममंथन करे और यह समझे कि जनता की नब्ज़ से कट जाने के बाद बहानेबाज़ी से हार नहीं छुप सकती. आखिर कब तक कांग्रेस अपनी असफलताओं का ठीकरा दूसरों पर फोड़ती रहेगी?



