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‘नरवा, गरूवा, घुरवा, बारी‘, वन मंत्री ने विभागीय कामकाज की समीक्षा की, छग में 137 नालों को पुनर्जीवित कर ढाई लाख हेक्टेयर भूमि को किया जा रहा उपचारित, वन क्षेत्रों में बड़े तालाबों के निर्माण को प्राथमिकता से शामिल करने के निर्देश

रायपुर. वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने राजधानी स्थित अपने निवास कार्यालय में वन विभाग के काम-काज की समीक्षा की। उन्होंने इस दौरान वन विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं नरवा विकास कार्यक्रम, वृक्षारोपण तथा आवर्ती चराई योजना के संबंध में विस्तार से समीक्षा करते हुए अधिकारियों को अपेक्षित प्रगति लाने के लिए आवश्यक निर्देश दिए।
वन मंत्री श्री अकबर ने नरवा विकास कार्यक्रम के तहत चिन्हांकित नालों के संरक्षण तथा संवर्धन कार्य के साथ-साथ वन क्षेत्रों में बड़े-बड़े तालाबों के निर्माण कार्य को भी अधिक से अधिक संख्या में शामिल करने के लिए निर्देशित किया। इसी तरह वन विभाग द्वारा आगामी बरसात के महीनों में वृक्षारोपण के लिए हर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने आवर्ती चराई योजना में लंबित कार्यों को शीघ्र स्वीकृत कराने और स्वीकृत सभी कार्यों को शीघ्रता से प्रारंभ करने के लिए भी निर्देशित किया।
राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना ‘नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी‘ के अंतर्गत नरवा विकास कार्यक्रम में वन विभाग द्वारा वर्ष 2019-20 में राज्य के 137 छोटे-बड़े नालों को लगभग 160 करोड़ रूपए की लागत राशि से पुनर्जीवित करने का कार्य जारी है। विभागीय अधिकारियों द्वारा आज यहां बताया गया कि इसके तहत नालों में 56 हजार 709 विभिन्न संरचनाओं के माध्यम से दो लाख 44 हजार 690 हेक्टेयर  भूमि को उपचारित करने का लक्ष्य है। इन संरचनाओं में ब्रशवुड चेकडेम, लूज बोल्डर चेकडेम, स्टाप डेम, चेकडेम, तालाब तथा स्टाप डेम आदि कार्य का निर्माण किया जा रहा है। नरवा विकास कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2020-21 में छत्तीसगढ़ प्रतिकरात्मक वनरोपण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैम्पा) के तहत वन क्षेत्रों में स्थित 308 छोटे-बड़ों नालों को 211 करोड़ रूपए की लागत राशि से पुनर्जीवित करने का कार्य प्रस्तावित है। इनमें एक हजार 142 स्टाप डेम, मिट्टी के बांध, एनीकट, चेक डेम तथा परकुलेशन टैंक आदि संरचनाओं के माध्यम से 3 लाख 70 हजार 193 हेक्टेयर भूमि को उपचारित करने का लक्ष्य निर्धारित है।
इसी तरह वन विभाग द्वारा चालू वर्ष 2020-21 में विभिन्न मद के अंतर्गत लगभग 7 करोड़ पौधों के रोपण का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में जानकारी दी गई कि इसके लिए प्रदेश के सभी नर्सरी में पौध रोपण के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में पौधे तैयार कर लिए गए हैं। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि वन प्रबंधन समितियों की सूक्ष्म प्रबंध योजना के तहत आवर्ती चराई योजना के अंतर्गत राज्य में 848 कार्य प्रस्तावित हैं। वर्तमान में इसमें से 590 कार्य स्वीकृत हो गए हैं और स्वीकृत 324 कार्यों का निर्माण प्रारंभ हो गया है। इस अवसर पर वन विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ, सचिव जयसिंह म्हस्के, प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) अतुल कुमार शुक्ल, कैम्पा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी व्ही. श्रीनिवास राव, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरूण पाण्डेय सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
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