सम्पादकीय-लेख

लेख – कोरोना, बेपरवाही और संक्रमण

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राजकुमार साहू

कोरोना वैश्विक महामारी है, यह बात देश और प्रदेश के लोगों ने जिस दिन सुनीं, उस दिन से इस गंभीर बीमारी को लेकर लोगों के मन में डर बैठ गया था। जब तक इस बीमारी ने पैर नहीं पसारा था, बड़े शहरों तक ही उसकी आहट थी और छोटे शहरों से गांव तक इस कोरोना नाम की बीमारी की केवल दहशतभरी चर्चा थी, तब तक लोगों के जेहन में इस बीमारी का जबर्दस्त डर बना हुआ था, लेकिन जब यह बीमारी गांव की गलियों तक पहंुंची, तब तक लोगों ने उस डर को जैसे आत्मसात कर लिया है। तभी तो आज कोरोना का संक्रमण इतना बढ़ रहा है, फिर भी लोगों की बेपरवाही बनी हुई है। इस महामारी का डर तो है, लेकिन इससे बचाव को लेकर लोग संजीदा भी नहीं है। इस महामारी के बचाव के जो कायदे हैं, जो मापदण्ड हैं, उसे दरकिनार कर लोग खुद की जान तो जोखिम में डाल ही रहे हैं, अपने आसपास के लोगों को भी संकट में डालने से नहीं चूक रहे हैं।

सरकार, चाहे केन्द्र की हो या फिर राज्यों की, कोरोना बीमारी की जागरूकता के लिए कोई कमी नहीं की है। इस वैश्विक महामारी से बचाव को लेकर मार्च से अब तक सरकारें लगातार अभियान चला रही हैं। इतना जरूर है कि कोरोना बीमारी जितना बड़ा खतरा है, उस अनुपात में देश और प्रदेशों में स्वास्थ्यगत संसाधन नहीं है, यह जरूर चिंता की बात है। यह भी सही है कि केन्द्र और राज्य की सरकारों ने कोरोना को देखते हुए बीते कुछ महीनों में स्वास्थ्य सुविधा बढ़ाई है, लेकिन भारत जैसे इतने बड़े देश की जनसंख्या के लिहाज से व्यापक संसाधन, सरकार द्वारा नहीं जुटाई जा सकी है। कोरोना से लड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं, परंतु यदि देश में स्वास्थ्य संबंधी संसाधन, पहले से विकसित होते तो आज कोरोना महामारी से लड़ने में देश, कहीं और अधिक आगे होता।

देश की जनसंख्या और जरूरत के हिसाब से स्वास्थ्य क्षेत्र में जिस तरह से अब तक खर्च होते आया है, उस लिहाज से यदि देश में कोरोना संक्रमण बढ़ता है तो अभी का स्वाथ्य बजट, नाकाफी ही साबित होगा। ऐसे में स्वास्थ्य बजट बढ़ाकर अभी और अधिक संसाधन जुटाने की जरूरत है। संसाधन की कमी का ही परिणाम है कि जितने सैंपल की जांच होनी चाहिए, वह नहीं हो रही है। जांच मशीनों की कमी और टेक्नीकल स्टाफ या दूसरे संसाधन की कमी अभी भी बनी हुई है। सरकार धीरे-धीरे कमियों को दूर करने की कोशिश कर रही है, कुछ बजट बढ़ा दिया गया है, स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार काम भी सतत कर रही है, लेकिन पहले से कमजोर स्वास्थ्य संसाधन के चलते दिक्कतें खत्म नहीं हो रही है। ऐसे हालात में देश के लोगों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। लोगों को अपने कर्तब्य निभाने चाहिए और सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर कोरोना से लड़ने की नीति के साथ चलना चाहिए, लेकिन कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद भी लोगों में जिस तरह इस वैश्विक महामारी कोरोना को लेकर बेपरवाही बनी हुई है, यह कतई उचित नहीं है और यह सरकार की कोशिशों को पीछे धकेलने की स्थिति है।

कोरोना के बचाव के लिए दो सबसे बड़े कारगर उपाय हैं, एक – सार्वजनिक जगह पर मास्क लगाना और दूसरा – सोशल डिस्टेसिंग के नियमों का पालन करना अर्थात एक निश्चित दूरी बनाकर रखना। कोरोना की लड़ाई में ये दोनों अचूक हथियार है, लेकिन अभी तक लोगों की बेपरवाही ने कोरोना संक्रमण को बढ़ाने का ही काम किया है। मार्च में कोरोना का प्रकोप बड़े शहरों में दिखा, अप्रेल में छोटे शहरों में कोरोना की आहट शुरू हुई और फिर मई तक इस बीमारी ने गांवों की गलियों तक अपनी पहुंच बना ली। इस बीच में भी कोरोना को लेकर जुबान में चर्चा तो रही, लेकिन कोरोना के बचाव के उपाय पर अमल करते लोग नजर नहीं आए। लॉकडाउन में भी लोगों की बेपरवाही अक्सर सामने आती रहती थी, लेकिन अनलॉक होने के बाद लोगों की बेपरवाही ने तो हदें ही पार कर दी। ना मास्क और ना सोशल डिस्टेंसिंग, नतीजा यह रहा कि फिर से लॉकडाउन की नौबत आ गई, लेकिन कोरोना से लड़ने लॉकडाउन स्थायी उपाय नहीं हो सकता। कोरोना से जंग जीतना है तो बस, बचाव के नियमों का लोगों को पालन करना होगा, उसके पहले कोरोना से जंग जीतना, मुश्किल ही होगा। मास्क लगाने के साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग ही सार्थक और स्थायी उपाय है। साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा सकता है।

कोरोना की जंग में सरकार की तरफ से भी कुछ मामलों में चूक हुई है। क्वारेंटाइन किए गए लोगों का सैम्पल लिया गया था, लेकिन रिपोर्ट के आए बगैर ही लोगों को क्वारेंटाइन मुक्त किया गया था और कुछ दिनों बाद में बहुत से लोगों की कोरोना रिपोर्ट पाजिटिव आई। इस दौरान ये लोग, दर्जनों जगहों में जा चुके थे, रिश्तेदारों के घर जा चुके थे, कुछ सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल हो चुके थे। इसके बाद इस चूक के दुष्परिणाम भी सामने आए। संक्रमित लोगों के सम्पर्क में और भी लोग आए, इस तरह कोरोना का दायरा बढ़ गया। देश और प्रदेशों में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है और मौत की संख्या भी बढ़ रही है। ऐसे में अब और अधिक सतर्कता और जागरूता की जरूरत है, तभी अनजान दुश्मन ‘कोरोना’ से जंग जीती जा सकती है।

हालांकि, अभी भी देर नहीं हुई है। अभी भी संभलने का वक्त है। सरकार को स्वास्थ्य संबंधी संसाधन बढ़ाने की जहां जरूरत है तो वहीं लोगों को बचाव के उपायों पर गंभीरता से ध्यान देने की और उसे हर वक्त अमल में लाने की आवश्यकता है। कोरोना एक ऐसा अनजान दुश्मन है, जो हम पर वार कर सकता है, हम नहीं कर सकते, हम केवल इस अनजान दुश्मन से अपना बचाव कर सकते हैं। ऐसे में यही कहा जा सकता है कि जागरूकता, सतर्कता और बचाव के नियमों को बेहतर तरीके से पालन करने की जरूरत है, तभी कोरोना के संक्रमण को रोका जा सकता है और अब जो उसकी चेन बनती जा रही है, उसे तोड़ना भी जरूरी है। यह तभी संभव है, जब लोग, जागरूक होकर बिना कोई सरकारी दबाव के कोरोना के बचाव के नियमों का खुद ही पालन करे। अंत में, हम यही कहेंगे, जहां भी जाएं ‘मास्क’ लगाएं और ‘सोशल डिस्टेंस’ बनाकर रखें, यही है कोरोना से बचाव का अचूक उपाय।

( लेखक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार हैं। )


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