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बस्तर में सुपोषण से जुड़ी महिला स्वावलंबन की राह, कुपोषण दूर करने मूंगफल्ली, गुड़ और काजू के लड्डू तैयार कर रही बिहान की महिलाएं

रायपुर. एक पंथ और दो काज वाली कहावत, वनांचल और आदिवासी क्षेत्र बस्तर में चरितार्थ हो रही है, जहां सुपोषण और महिला स्वालंबन के लक्ष्य को एक साथ साधा जा रहा है। प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल की पहल पर बस्तर में कुपोषण और एनीमिया की चुनौती से सभी स्तरों पर बड़ी लड़ाई लड़ी जा रही है। इसकेे लिए सभी विभागों द्वारा समन्वित प्रयास किये जा रहे हैं।
कुपोषण मुक्ति अभियान से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़ी बिहान समूह की महिलाओं को जोड़ा गया है। इन महिलाओं को महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रशिक्षित कर कुपोषण दूर करने के लिए मूंगफली, गुड़ और काजू से लड्डू तैयार करने का काम दिया गया है।
ये महिला समूह न सिर्फ लड्डू तैयार कर रही हैं बल्कि उसकी पैकिंग के लिए डब्बे भी खुद बनाती हैं। इससे महिलाओं के स्वालंबन की नई राह भी तैयार हो गई है। लड्डू बनाकर महिला समूहों ने अब तक 31.50 लाख रूपये आय प्राप्त कर ली है।
बस्तर में जिले में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के अंर्तगत 06 माह से 06 आयु वर्ष के बच्चे ‘‘हरिक नानी बेरा‘‘ (खुशहाल बचपन) व 15 आयु वर्ष से 49 आयु वर्ष के गंभीर एनीमिक महिलाओं के लिए आमचो लेकी, आमचो माय (हमारी लड़की हमारी माता) आरंभ किया गया है। इसके लिए नोडल एजेन्सी पंचायत एवं ग्रामीण विकास है। बिहान समूह की महिलाओं द्वारा तैयार मूंगफली,गुड़ और काजू से पौष्टिक लड्डू को ‘‘हरिक नानीबेरा (खुशहाल बचपन)‘‘ अभियान अंतर्गत जिले के 1081 आंगनबाड़ी केन्द्रों में 41 हजार 474 बच्चों को अतिरिक्त पूरक पोषण आहार के रूप में प्रदान किया जा रहा है। योजना को अब 1981 आंगनवाडी केंद्र के 72 हजार लाभार्थियों तक विस्तारित कर दिया गया है। इसके तहत बच्चों को सोमवार, बुधवार, शुक्रवार 3 दिन मूंगफल्ली गुड़ का 25 ग्राम का 01 लड्डू लडडू और मंगलवार, गुरूवार तथा शनिवार को 3 दिवस एक उबला अण्डा प्रदान किया जाएगा।
समूहों द्वारा लड्डू तैयार करने से लेकर वितरण तक जिला प्रशासन द्वारा पूरी कार्ययोजना तैयार की गई है,जिससे कुपोषण को दूर करने के साथ महिलाओं को भी आत्मनिर्भर किया जा सके। कलस्टर आधार पर महिला समूहों का चयन किया गया है। चयन के पश्चात् लड्डू बनाने के लिए जिला स्तर पर महिला बाल विकास विभाग की ओर से प्रशिक्षण भी दिया गया है। प्रथम चरण में 81 आंगनबाड़ी केंद्रो के लिए 5 महिलए समूह, द्वितीय चरण हेतु 1081 केंद्रो के लिए 11 समूह और तृतीय चरण हेतु 1981 केंद्रो के लिए 24 स्व-सहायता समूहों का चयन लडडू बनाने के लिए किया गया है। प्रति किलो 650 ग्राम मुंगफल्ली, 350 ग्राम गुड़ और काजू, इलायची स्वादानुसार मिलाकर समूह के माध्यम से लडडू तैयार किया जाता है। इसके बाद विकासखण्ड के महिला बाल विकास विभाग, सेक्टर, आँगनबाड़ी केंद्र तक सप्लाई की जाती है।
महिला समूह के 10 सदस्यों के माध्यम से प्रतिदिन 2000 से 2500 लड्डू निर्माण किया जाता है। समूहों द्वारा अब तक 65.37 लाख रूपये का 12.48 लाख लड्डू वितरण किया जा चुका है। इससे समूह को 31.50 लाख रूपये की आय प्राप्त हुई है। प्रति नग लड्डू की दर से समूह के खाते मे विभाग के माध्यम से राशि प्राप्त होती है।
लड्डू टूटे ना इसलिए उसे रखने के लिए समूह को मिठाई का डिब्बा बाहर से लेना पड़ता था,जिससे उन्हें दिक्कत होती थी। इसलिए डिब्बा बनाने हेतु 5 समूह को जिला स्तर पर प्रशिक्षित किया गया । अब ये समूह मिठाई डिब्बा बनाकर लड्डू प्रदाय करने वाले समूहों को सप्लाई करते है। डिब्बा बनाने मे समूह के माध्यम से एक लाख रूपए की पूंजी लगाया गया, जिससे 13 हजार 335 डिब्बा बनाए गए। प्रति डिब्बा 10 रूपये की दर से अर्थात् 1 लाख 33 हजार रूपये मे बेचने पर समूह को 33 हजार रूपये आमदानी हुई है।
अभियान का क्रियान्वयन,निगरानी और मार्गदर्शन ग्राम पंचायत स्तर पर किया जा रहा है। स्थानीय महिला समूहों की मासिक बैठक आंगबनाड़ी केन्द्रों में किया जा रहा है,इन केन्द्रों में ही बच्चों के लिए लड्डु और उबला अण्डा प्रदान किया जाता है। इस दौरान महिलाओं द्वारा स्वच्छता कुपोषण और पोषण आहार पर चर्चा की जाती है।

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