छत्तीसगढ़ जांजगीर-चाम्पा

‘मित्र कीट पर आधारित है मेरा 30 एकड़ की जैविक खेती’, प्रगतिशील श्यामलाल ने 21 प्रकार की देशी धान की खेती में कोई भी प्रकार की बीमारी नहीं, 20 साल से खेत में इस्तेमाल नहीं किया कीटनाशक दवाई

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जांजगीर-चाम्पा. धान की फसल को बीमारी से बचाने इस समय जिले के किसान परेशान हैं। कीटनाशक दवाओं का छिड़काव बेअसर साबित हो रही है, लेकिन जिला मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर दूर बिरगहनी ( च ) के किसान श्यामलाल राठौर द्वारा दर्राभाठा नेशनल हाईवे किनारे किये जा रहे 30 एकड़ जमीन पर देशी धान की खेती में किसी तरह की कोई बीमारी नहीं है। उन्होंने 20 साल से अपनी खेती में किसी भी प्रकार की कोई कीटनाशक दवाओं का प्रयोग नहीं किया है। उनका खेती मित्र कीट पर ही आधारित है।

बलौदा ब्लॉक के बिरगहनी ( च ) के 74 साल के प्रगतिशील किसान श्यामलाल राठौर ने भारतीय अर्थात देशी किस्म की रानीकाजर, गुरमटिया सफरी लुचाई पडकी परेवना समेत 21 प्रकार के अलावा सुगंधित धान की खेती इस समय 30 एकड़ जमीन पर कर रहे हैं। आसपास के किसान अधिक फ़सल उत्पादन के लिए रासायनिक खादों का इस्तेमाल कर रहे हैं। जिससे अन्य किसानों के खेतों में लगे धान की फसल में भूरा माहों, झुलसा, तना भेदक, गलन, बंकी व अन्य कई तरह की बीमारी लगी हुई है। किसान इन बीमारियों के नियंत्रण के लिए कई तरह की कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं लेकिन कीटनाशक दवाओं का छिड़काव इस समय बिल्कुल ही बेअसर साबित हो रही है।

 

श्यामलाल ने गोठान से खरीदी सौ बोरी केचुआ खाद
किसान श्री राठौर ने बताया कि उनके घर में एक गोबर गैस सयंत्र है। उससे निकलने वाले स्लरी का उपयोग वे हरेक साल अपने खेती में करते हैं लेकिन इस बार स्लरी के साथ साथ यहाँ के गौठान से सौ बोरी केचुआ खाद खरीदकर खेती में उपयोग किया। वहीं तीन क्विंटल ढेंचा और पच्चीस किलो रामतिल की बीज खेत में बुआई करके हरी खाद के रूप में उपयोग किया। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति काफी अधिक बढ़ गई। जिससे उनके खेती में धान फसल की अच्छा पैदावार दिखाई दे रही है। 20 साल से उनके खेत में किसी तरह की बीमारी का प्रकोप नहीं होने तथा इस साल देशी धान की बड़े पैमाने पर 21 किस्म की धान की बिना रासायनिक खादों व कीटनाशक दवाओं के प्रयोग से की जा रही परंपरागत तरीके की खेती जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।

अभी से ही मिल रहा ऑर्डर
छत्तीसगढ़ में पहले देशी धान की खूब खेती होता था लेकिन जब से हाइब्रिड धान आया तो किसान देशी धान की खेती करना छोड़ दिया, मगर जिले में कुछ ऐसे भी किसान है जो सालों से संग्रहित कर खेती कर रहे हैं, लेकिन इस बार श्यामलाल राठौर ने बहेराडीह के किसान दीनदयाल यादव, सिवनी के रामाधार देवांगन, जर्वे च के अमित कुमार तिवारी, पचेड़ा के हीरानंद कश्यप व अन्य किसानों के सहयोग से बड़े पैमाने पर देशी धान की खेती कर रहे हैं। बीज के लिए अभी से ही कई जिले के किसानो से ऑर्डर मिल रहा है।


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