कोरोना काल में ये दृष्टिबाधित महिला बन गईं सफल आंत्रप्रेन्योर, आज कर रही हैं लाखों की कमाई… जज्बे की कहानी… विस्तार से पढ़िए…

कोरोना काल के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने रोज़गार खो दिये हैं, हालांकि, इस बीच कुछ लोग ऐसे भी रहे हैं, जिन्होने इस कठिन समय को भी अवसर में बदलते हुए अपनीकड़ी मेहनत के बल पर अपने लिए सफलता की नई कहानी लिखी है। गीता सलिश एक ऐसी ही शख्स हैं, जिन्होने ना सिर्फ उद्यमिता में अपना लोहा मनवाया है, बल्कि वे आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं।

 



गौरतलब है कि गीता ने बचपन में ही अपनी आँखों की रोशनी को खो दिया था, हालांकि उन्होने इस कमजोरी को कभी अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया और यह साबित कर दिखाया कि मन में लगन और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ मेहनत करने का इरादा हो तो कोई भी लक्ष्य पाया जा सकता है।

लॉकडाउन में बनीं सफल विमन आंत्रप्रेन्योर

36 वर्षीय गीता आज एक सफल विमेन आंत्रप्रेन्योर हैं, जो अपने ऑनलाइन फूड बिजनेस का सफलतापूर्वक संचालन कर रही हैं। दृष्टिबाधित होते हुए भी गीता ने कभी इसे कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। गीता के परिवार का पहले से ही एक रेस्तरां व्यवसाय था, हालांकि बाद में वह बंद हो गया और इस बीच उन्होने अंडे बेचने शुरू कर दिये।
गीता इस दौरान छोटे-मोटे व्यवसाय में भी हाथ आजमाती रहीं लेकिन उन्हें सफलता हासिल नहीं हो सकी। देश में कोरोना वायरस महमारी के आने के बाद जब लॉकडाउन की घोषणा की गई तब गीता ने परेशान होने के बजाय इस समय को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने का विकल्प चुना।
गीता ने इस दौरान अपने पति की मदद से खाना पकाने के अपने जुनून को अगले स्तर तक ले जाने के लिए ‘गीताज़ होम टू होम’ वेबसाइट की शुरुआत कर दी।

इसे भी पढ़े -  Janjgir News : हरिलीला ट्रस्ट के आयोजन ‘भक्ति राग जांजगीर’ में शामिल होंगे केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, 16 अक्टूबर को शहनाज अख्तर की भक्ति संध्या एक शाम माँ के नाम कार्यक्रम हाईस्कूल मैदान में आयोजित, प्रवेश निःशुल्क

चली गई थी आँख की रोशनी

गीता सलेश जब महज 13 साल की थीं, तब उनकी आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होने लगी थी। समय के साथ उसकी दृष्टि बिल्कुल कम हो गई। इस दौरान पता चला कि उन्हें रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा नाम का एक दुर्लभ आनुवंशिक रोग हुआ है। इसी के साथ 15 वर्ष की आयु के साथ वे लगभग पूरी तरह से दृष्टिबाधित हो गई थीं।
इस बीमारी से जूझते हुए वे केवल प्रकाश की उपस्थिति को समझ सकती थी। केरल के ओट्टापलम की रहने वाली गीता ने मीडिया को बताया है कि जब लाइट ऑन की जाती है तब वे बस उसे महसूस कर पाती हैं।

इसे भी पढ़े -  Sakti News : लोकतंत्र में आरोप नहीं, ठोस प्रमाण मायने रखते हैं : लोकेश साहू

कई राज्यों तक पहुंचा व्यवसाय

गीता अब घी और चटनी के साथ ही आचार आदि उत्पादों को तैयार करती हैं और गीता द्वारा बनाए गए ये उत्पाद राजस्थान और मध्य प्रदेश के साथ ही कई अन्य राज्यों में भी भेजे जाते हैं। मालूम हो कि आज गीता अपने सफल व्यवसाय के जरिये हर महीने करीब डेढ़ लाख रुपये तक की कमाई कर लेती हैं।

इसे भी पढ़े -  Akaltara News : बनाहिल में स्थित श्री ऋषभ विद्योदय महाविद्यालय की होनहार छात्रा ममता बंजारे का शानदार प्रदर्शन, विश्वविद्यालय स्तर के लिए दूसरी बार चयनित

Related posts:

error: Content is protected !!