जानें क्यों कहा जाता था….भारत को विश्वगुरु और इसमें नालंदा का कितना रहा…योगदान पढिए

जानें क्यों कहा जाता था….भारत को विश्वगुरु और इसमें नालंदा का कितना रहा…योगदान पढिए

 



क्या आप जानते हैं, भारत को विश्वगुरु क्यों कहा जाता था? क्योंकि, वह भारत ही था, जिसने पूरे विश्व को सबसे पहले सभ्यता की राह दिखाई। वह भारत ही था, जिसने शिक्षा और अनुशासन का मोल पूरी दुनिया को सिखाया।

यह धरोहरों की देवभूमि है। आपने ‘नालंदा विश्वविद्यालय (Nalanda University)’ का नाम तो जरूर सुना होगा, जहाँ दूर-दूर से लोग शिक्षा ग्रहण करने आते थे।

नालंदा, प्राचीन भारत में उच्च शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध केन्द्र था।

युनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट के रूप में पहचानी जाने वाली, बिहार के नालंदा की जड़ें, इतिहास में कहीं रची-बसी हैं। आज भी नालंदा विश्वविद्यालय (Nalanda University) के अवशेष आप बिहार के नालंदा जिले में देख सकते हैं।

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नालंदा विश्वविद्यालय (Nalanda University) का स्वर्णिम इतिहास

  • लोक कथाओं की मानें तो नालंदा के उद्गम का इतिहास स्वयं गौतम बुद्ध से जुड़ा हुआ है।
  • कहा जाता है कि 7वीं शताब्दी में भारत आए चीनी यात्री ह्वेन त्सेंग ने ‘नालंदा’ नाम के एक नाग के बारे में लिखा था।
  • यह नाग आम के एक बागान में स्थित तालाब में रहता था।
  • आगे चलकर उसी जगह पर नालंदा विश्वविद्यालय (Nalanda University) बना।
  • त्सेंग ने आगे यह भी लिखा कि उस बागान को 500 व्यापारियों ने खरीदा और गौतम बुद्ध को दे दिया था।
  • कहते हैं गौतम बुद्ध ने इसी बागान में बैठकर, बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार किया।
  • शायद यही कारण था कि उसी जगह पर विश्वविद्यालय की स्थापना की गई
  • विश्वविद्यालय (Nalanda University) की स्थापना का श्रेय गुप्त शासक, कुमारगुप्त प्रथम को जाता है।
  • इसे हेमंत कुमार गुप्त के उत्तराधिकारियों का भी पूरा सहयोग मिला।
  • गुप्तवंश के पतन के बाद भी आगे आने वाले सभी शासक वंशों ने इसकी समृद्धि में अपना योगदान जारी रखा।
  • इसे महान सम्राट हर्षवर्द्धन और पाल शासकों का भी संरक्षण मिला।
  • स्थानीय शासकों और भारत के अलग-अलग क्षेत्रों के साथ ही इसे (Nalanda University) कई विदेशी शासकों से भी अनुदान मिला।
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