Press "Enter" to skip to content

Saturday Superstar: हॉलिवुड में देश का नाम चमकाने वाला….पहला इंडियन ऐक्टर साबू दस्तगीर, जो 58 साल से…..गुमनामी के अंधेरे में खो गया है

सैटरडे सुपरस्‍टार’ सीरीज में आज चर्चा साबू की। ये नाम आपने सिर्फ फेमस कॉमिक्स चाचा चौधरी में ही पढ़ा होगा। लेकिन क्या आप उस साबू के बारे में जानते हैं, जो हॉलिवुड में देश का नाम चमकाने वाला पहला इंडियन ऐक्टर था! वो शख्स, जिसकी किस्मत रातों-रात पलट गई थी… हाथी के अस्तबल में काम करने वाले अनाथ और गरीब साबू को अंदाजा भी नहीं था कि जिंदगी उसे किस मुकाम तक पहुंचाने वाली है।

उन्होंने न सिर्फ कई हॉलिवुड मूवीज में काम किया, बल्कि सेकेंड वर्ल्ड वॉर के दौरान एयरफोर्स में भी शामिल हुए। लेकिन इसी किस्मत ने उन्हें अर्श से फर्श पर भी पहुंचा दिया। जिस फिल्म से सुनील दत्त को बॉलिवुड में शोहरत मिली, वो भी साबू को ऑफर हुई, लेकिन कुछ ऐसा हुआ कि वो हिंदी फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंच नहीं पाए।

अगर वो इस फिल्म में होते तो शायद वो सबकुछ नहीं होता, जो उनके साथ जिंदगी के आखिरी समय में हुआ। आइये जानते हैं इस साबू दस्तगीर (Sabu Dastagir) की दिलचस्प कहानी के बारे में।

ये बात है 30 के दशक की। साबू के पिता मैसूर के महाराज के हाथी के महावत थे। सबकुछ ठीक था, लेकिन 9 साल की उम्र में साबू ने अपने पिता को खो दिया। वो और उनके बड़े भाई शेक दस्तगीर के सिर पर अब किसी का हाथ नहीं रहा।

READ ALSO-  SC Verdict on Navjot Sidhu: नवजोत सिद्धू को एक साल की सजा, 34 साल पुराने रोडरेज केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला

उनका वक्त महाराजा के हाथियों के अस्तबल में गुजरने लगा। लेकिन साबू को पता नहीं था कि इसी हाथी पर सवार होकर वो हॉलिवुड में देश का नाम बुलंद करने वाले हैं।

नहीं पता था, जिंदगी बदलने वाली है…

1935 में रॉबर्ट जे फ्लाहर्टी अपकमिंग मूवी ‘एलिफेंट बॉय’ की तलाश में इंडिया आए। वो पहले ही ‘नानूक ऑफ द नॉर्थ’ और ‘मोआना’ जैसी डॉक्युमेंट्री बनाकर वाहवाही लूट चुके थे।

जब वो मैसूर पहुंचे तो एक दिन दोपहर में टहलते-टहलते हाथियों के उसी अस्तबल पर पहुंच गए, जहां साबू रहते थे। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 11 साल थी और विदेशी को देख साबू की खुशी का ठिएकाना नहीं रहा।

वो इतने उत्साहित हुए कि हाथी पर चढ़कर एक से बढ़कर एक करतब दिखा डाले। उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि वो एक फिल्म में लीड ऐक्टर के लिए ऑडिशन दे रहे थे और इस बात का बिल्कुल भी अहसास नहीं था कि वो चुन लिए गए थे।

साबू और उनके भाई शेक दस्तगीर को लंदन ले जाने के लिए सारी तैयारी कर ली गई। हालांकि, नाम लिखने के दौरान इमिग्रेशन फॉर्म में गड़बड़ी हुई और साबू का नाम साबू दस्तगीर लिख दिया गया।

विदेश में लीगल पेपर्स पर तो उनका नाम सेलार साबू दर्ज है। 2 साल बाद 1937 में ‘एलिफेंट बॉय’ रिलीज हुई और बड़े पर्दे पर साबू ने जो कारनामा कर दिखाया, वो काबिले तारीफ था। हर तरफ सिर्फ उनका ही नाम, उनकी ही चर्चा हो रही थी।

READ ALSO-  Junior NTR Birthday: राजा-महाराजाओं की जिंदगी जीते हैं....जूनियर एनटीआर, RRR स्टार की नेट वर्थ जान उड़ जाएंगे...आपके होश...जानिए विस्तार से

सेलार साबू

‘एलिफेंट बॉय’ के बाद साबू सभी फिल्ममेकर्स के चहेते बन गए थे। उनकी ऐक्टिंग की खूब सराहना हुई। इसके बाद उनकी एक के बाद एक कई हॉलिवुड मूवीज रिलीज हुई। इनमें ‘द ड्रम’, ‘द थीफ ऑफ बगदाद’, ‘अरेबियन नाइट्स’, ‘कोबरा वुमन’ और ‘तंजार’। उन्होंने 1942 में रिलीज हुई ‘द जंगल बुक’ में मोगली का किरदार निभाकर भी सभी का दिल जीत लिया था।

दूसरे विश्वयुद्ध में हुए शामिल

चूंकि साबू हॉलिवुड मूवीज कर लगे थे, इसलिए वो मैसूर छोड़ चुके थे और अमेरिका की नागरिकता अपनाकर वहीं पर घर बना लिया था। यही नहीं, जब दूसरा विश्व युद्ध छिड़ा था तो वो बतौर मशीन गनर यूनाइटेड स्टेट्स के एयरफोर्स में भी शामिल हो गए थे।

अर्श से फर्श पर पहुंचने लगे साबू
विदेश में देश का परचम लहराने वाले साबू को जिस किस्मत ने चमकता सितारा बनाया, उसी ने इस सितारे को बुझाना शुरू कर दिया। उनके करियर का ग्राफ अब धीरे-धीरे गिरने लगा था। एक जैसा किरदार करने की वजह से उनके पास ऑफर्स की कमी होने लगी थी। 50 के दशक में जब फिल्में मिलनी बंद होने लगी तो उन्होंने बिजनस की तरफ रुख किया। उनकी आखिरी मूवी ‘ए टाइगर वॉक्स’ 58 साल पहले रिलीज हुई थी।

READ ALSO-  जल्द मिलेगी 5G नेटवर्क की स्पीड, किया गया सफल परीक्षण, केंद्रीय मंत्री ने किया...वीडियो कॉल पढिए

 

यहां हैरानी इस बात की भी होती है कि साबू ने किसी बॉलिवुड मूवी में काम नहीं किया। हालांकि, उन्हें एक बार ये मौका जरूर मिला था। 1957 में ‘मदर इंडिया’ में बिरजू का किरदार निभाने के लिए साबू को अप्रोच किया गया था। उन्होंने हामी भी भर दी और उन्हें भारत वापस लाने की कोशिशें भी खूब हुईं, लेकिन जो नाकाम रहीं। वर्क पर्मिट नहीं मिलने के कारण वो बिरजू न बन सकें और उनकी जगह सुनील दत्त इस फिल्म से देश में छा गए थे।

 

गुमनामी में खो गए
अगर उस समय साबू को भारत आने की परमिशन मिल गई होती और मदर इंडिया में वो बिरजू बनते तो शायद उनका नाम कभी गुमनामी में खोया नहीं होता।

जिस तरह से हॉलिवुड फिल्मों में काम करने के लिए इरफान खान, अनुपम खेर सहित तमाम सितारों का नाम लिया जाता है, शायद इसी तरह साबू का नाम सबसे ऊपर होता, लेकिन ये न हो सका।

हॉलिवुड के ‘वॉक ऑफ फेम’ में एकलौते इंडियन ऐक्टर

साबू, हॉलिवुड के ‘वॉक ऑफ फेम’ में शामिल किए जाने वाले पहले और एकलौते भारतीय मूल के ऐक्टर हैं, लेकिन उनकी जिंदगी का सफर भी उसी तरह अचानक थम गया, जैसे अचानक उनकी जिंदगी बदल गई थी। 39 साल की उम्र में आए हार्ट अटैक ने उनकी जिंदगी पर विराम लगा दिया।

error: Content is protected !!