UPSC Success Stories: दोस्त उड़ाते थे मजाक लेकिन कर गईं यूपीएससी टॉप, पढ़िए नंदिनी के आईएएस बनने की कहानी

आईएएस आईपीएस बनकर देश की सेवा करने के बारे में हर कोई सोचता है। क्या गरीब की क्या अमीर हर घर के बच्चे यूपीएससी की परीक्षा पास कर IAS बनना चाहते हैं। आपके इरादे पक्के और मजबूत हों तो आप क्या कुछ नहीं कर सकते हैं।

 



यदि आपने अपने लक्ष्य को पाने के लिए ठान ही लिया हो तो फिर दुनिया की कोई ताकत आपको उससे पाने से रोक नहीं सकती है। यह सही कर दिखाया कर्नाटक के कोलार ज़िले के एक शिक्षक की बेटी नंदिनी ने, जिन्होंने न सिर्फ दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से के मानी जाने वाली यूपीएससी की परीक्षा को पास किया बल्कि प्रतिष्ठित सिविल सेवक भी बनीं।

नंदिनी की बेहद प्रेरणादायक कहानी, जिन्होंने तमाम बाधाओं से जूझते हुए आईएएस अधिकारी बन एक मिसाल कायम की है। अपने पहले प्रयास में उन्होंने 642वीं रैंक हासिल की और दिसंबर 2015 में आईआरएस सेवा ज्वाइन कर लिया था।

लेकिन 2016 में न सिर्फ वह आईएएस बनीं बल्कि टॉप भी किया। नंदिनी ने शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल से की है। बारहवीं की पढ़ाई के लिए वो चिकमंगलूर ज़िले के मूदाबिदरी आईं और परीक्षा में 94.83 प्रतिशत अंक प्राप्त किया।

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बेंगलुरू के एमएस रमैय्या इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी की सिविल इंजीनियरिंग की छात्रा रहीं आईएएस टॉपर नंदिनी कर्नाटक के कोलार ज़िले के एक शिक्षक की बेटी हैं। इंजीनियर होने के बावजूद नंदिनी ने कन्नड़ साहित्य को अपने वैकल्पिक विषय के रूप में चुना था। नंदिनी कहती हैं कि ‘सिर्फ प्रशासनिक सेवा ही क्यों, हम जहां भी हों, अपना सर्वश्रेष्ठ दें।’

पीडब्ल्यूडी में नौकरी के दौरान देखा आईएएस बनने का सपना

नंदिनी एमएस रमैय्या इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग करने के बाद तुरंत कर्नाटक के पीडब्ल्यूडी विभाग में नौकरी जॉइन कर ली। पीडब्ल्यूडी में कार्य करने के साथ ही उन्होंने ज़मीनी स्तर पर सरकार का कामकाज देखा और समझा।

नंदिनी मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहती हैं कि, “तब ही मैंने सोचा कि मैं आईएएस अफ़सर बनकर समाज के लिए बेहतर काम कर सकती हूं।”

पहले प्रयास में बनीं आईआरएस

नंदिनी ने 2015 में अपना पहला अटेम्प्ट दिया है। जिसमें उन्होंने 642वीं रैंक हासिल की थी और दिसंबर 2015 में आईआरएस सेवा ज्वाइन कर ट्रेनिंग शुरू कर दी थी। ट्रेनिंग के दौरान ही नंदिनी ने दिल्ली में एक कोचिंग संस्थान के साथ जुड़कर तैयारी करने का निर्णय लिया।

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मीडिया को दिए गए साक्षात्कार में नंदिनी कहती हैं, “एक आईडियल ऑफिसर यदि इरादे का पक्का हो, अपने काम के प्रति समर्पित हो और चुनौतियां स्वीकार करने के लिए हमेशा तैयार रहे तो वो समाज के लिए बहुत कुछ कर सकता है।”

दोस्त उड़ाते थे मजाक

परीक्षा परिणाम आने से सप्ताह भर पहले दोस्त नंदिनी का खूब मजाक बनाते थे। नंदिनी को बार- बार चिढ़ाते हुए उनके दोस्त मजे लेते थे कि इस बार की सिविल सेवा परीक्षा को नंदिनी ही टॉप करेंगी। लेकिन किसे पता था कि उनके दोस्त मजाक-मजाक जो बात कह रहे थे वो सच साबित हो सकती है। जब सिविल सेवा परीक्षा के नतीजे आए तो दोस्तों को और नंदिनी को बातों पर यक़ीन करना मुश्किल था।

साल 2016 के आए परिणाम में अनमोल शेरसिंह बेदी दूसरे स्थान पर और गोपालकृष्ण रोनांकी को तीसरा स्थान हासिल हुआ था। नंदिनी 2017 बैच की अधिकारी हैं और उन्होंने आईएएस परीक्षा में टॉप किया था। वह दो साल पहले बेल्लारी आयी थीं। इससे पहले वे तप्तिूर में सहायक आयुक्त थीं।

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वह नंदिनी कोलार के केम्बोडी गांव के रहने वाली हैं। बता दें कि कर्नाटक के बेल्लारी में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की अधिकारी केआर नंदिनी ने अपनी डिलिवरी के लिए प्राइवेट की जगह सरकारी अस्पताल को चुना था। मार्च 2022 में उन्होंने सरकारी अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया था।

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