UPSC Topper : पिता चलाते किराने की दुकान, बेटा पहले प्रयास में बिना कोचिंग के बना IAS, 8-10 घंटे की लगातार पढ़ाई… जानिए सफलता का राज 

नई दिल्ली. पहली बार में ही उड़ान भरकर आयुष ने अपने आईएएस बनने के लक्ष्य को हासिल कर लिया है। मंडोली रोड विश्वकर्मा गेट निवासी आयुष गोयल ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में सफल होकर 171 वीं रैंक प्राप्त की है। आयुष ने पहली बार में ही यूपीएससी की परीक्षा देकर अपने सपने का साकार कर दिखाया है।



इससे घर व पड़ोस में खुशी का माहौल है। आयुष के यूपीएससी में चयन की खबर सुनकर शुभकामनाएं देने के लिए दिनभर पड़ोसियों के आने जाने का सिलसिला भी चलता रहा। क्षेत्र के विधायक जितेंद्र महाजन भी उनके घर फूलों का गुलदस्ता लेकर शुभकामनाएं देने पहुंचे।

पिता की किराने की दुकान
आयुष के पिता सुभाष चंद्र गोयल एक किराना की दुकान चलाते हैं। मां मीना गोयल गृहिणी हैं। आयुष ने दिल्ली के सरकारी विद्यालय नंद नगरी स्थित राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय से पढ़ाई की है। दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कालेज से इन्होंने ग्रेजुएशन किया। आयुष ने बताया कि आईआईएम कोझिकोडे (केरल) से एमबीए की पढ़ाई के दौरान इंटरनेट मीडिया पर मोटिवेशनल वीडियो देखकर उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा देकर आईएएस बनने का निश्चय किया।

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8-10 घंटे की लगातार पढ़ाई
वह डेढ़ वर्ष से घर पर रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें इसके लिए कोई कोचिंग भी नहीं ली। प्रतिदिन आठ से 10 घंटे लगातार किताबें और आनलाइन वीडियो देखकर पढ़ाई की। पहली कोशिश में ही उन्होंने सफलता पा ली। इससे घर में सभी बहुत खुश हैं। उन्होंने सोचा नहीं था कि इतनी जल्दी मंजिल पा लेंगे। हालांकि, परीक्षा इसी विश्वास के साथ के दी थी कि एक ही बार में पास होना है।

तुषार शर्मा ने चौथी बार में पाई UPSC में सफलता
बलदेव पार्क निवासी तुषार शर्मा पिछले पांच वर्षों से यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं। यह उनकी चौथी कोशिश थी, जिसमें 340 रैंक लाकर आखिरकार उन्होंने अपनी मंजिल पा ही ली। तुषार की मां अंजलि शर्मा नगर निगम स्कूल में प्रधानाचार्या हैं। पिता अजय कुमार शर्मा बीएसईएस में सहायक उपाध्यक्ष हैं।

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तुषार ने बताया कि उनका आईआरएस में नंबर आएगा। वह इससे बहुत खुश हैं, क्योंकि वह एक बड़े सरकारी अधिकारी बनना चाहते थे। उन्होंने आईआईटी बाम्बे से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। वह ओला कैप कंपनी में एसोसिएट प्रोग्राम मैनेजर थे।

कर्नाटक सरकार की तरफ से उन्हें काम मिलता था, जिसके चलते उनकी मुलाकात कई बड़े सरकारी अधिकारियों से होती थी, जिन्हें देखकर ही उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा देने का मन बनाया। 2018 में नौकरी छोड़कर उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। तुषार की इस उपलब्धि से खुश होकर पड़ोस में रहने वाले आरडब्ल्यूए अध्यक्ष श्रवण दीक्षित और कोषाध्यक्ष मंयक वशिष्ठ ने उन्हें घर जाकर बधाई दी।

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