लोगों का बैंक खाता खाली कर रहे साइबर ठग, ठगी के नए तरीके से हो जाएंगे हैरान, आप भी हो जाए सावधान…

साइबर ठगी के मामले दिनोंदिन बढ़ते जा रहे हैं, दूसरी ओर लोगों की मेहनत की कमाई लुट रही है। साइबर ठगों के नए तरीकों से पुलिस भी हैरान है। साइबर ठग लोगों का बैंक खाता खाली कर रहे हैं।



 

 

 

अब तो साइबर ठग लोन की रकम भी ऑनलाइन लूट रहे हैं। दून में ठगी के चार मामलों में पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। एक महिला समेत चार लोगों ने विभिन्न थानों में ऑनलाइन धोखाधड़ी की तहरीर देकर कार्रवाई की मांग उठाई है।

 

 

 

कस्टमर केयर ऑफिसर बन ठगी

एक व्यक्ति ने एक लाख रुपये का लोन लिया और रकम ठगी में गंवा दी। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। पटेलनगर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक कमल कुमार के अनुसार, रामनरेश निवासी ब्रह्मपुरी निरंजनपुर ने तहरीर दी कि छह नवंबर को उन्होंने होम क्रेडिट के माध्यम से एक लाख का ऑनलाइन लोन लिया था।

 

 

 

यह रकम उसी दिन उनके खाते में आ गई थी। इसके बाद उनको अनजान नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को होम क्रेडिट का मैनेजर बताया। उसने रामनरेश को बताया कि उन्होंने जो लोन लिया, वो बहुत महंगा है। आरोपी ने एजुकेशन लोन के लिए रामनरेश को मना लिया। आरोपी ने कहा कि इसके लिए पुराने लोन की रकम लौटानी होगी।

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आरोपी ने व्हाट्सऐप के जरिए एक क्यूआर कोड भेजा था, जिस पर रामनरेश ने ऑनलाइन लगभग एक लाख रुपये भेज दिए।  इसके बाद आरोपी का फोन नंबर बंद हो गया। रामनरेश ने होम क्रेडिट के कस्टमर केयर नंबर पर पूछा तो पता चला होम क्रेडिट की ओर से कोई कॉल नहीं की गई थी।

 

 

 

सोलर वाटर पंप के नाम पर 2.24 लाख रुपये ठग लिए

देहरादून निवासी एक व्यक्ति से सोलर वाटर पंप के नाम पर करीब 2.24 लाख रुपये ठग लिए गए। साइबर ठगों ने सरकार की कुसुम योजना के नाम से ऑनलाइन नंबर डाला था, जिस पर संपर्क करके पीड़ित उनके जाल में फंस गया।

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पटेलनगर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक कमल कुमार ने बताया कि रोशन सिंह निवासी बंजारावाला ने तहरीर दी कि वो सोलर वाटर पम्प लगवाना चाहते थे। उनको पता चला कि कुसुम योजना के तहत सरकारी सब्सिडी पर पम्प लगवाया जा सकता है। उन्हें इंटरनेट पर कुसुम योजना के नाम का एक फोन नंबर मिला।

 

 

 

इस नंबर पर कॉल की तो विकास जैन नाम के व्यक्ति से बात हुई। उसने विश्वास में लेकर रोशन से सभी दस्तावेज मंगवा लिए। 15 जून को आरोपी ने कहा कि फाइल मंजूर हो गई है। इसके लिए 5600 रुपये फाइलिंग चार्ज लिया गया।

 

 

 

उसी दिन दोबारा ट्रांसपोर्ट चार्ज के नाम पर 7850 रुपये मांगे। दो दिन बाद आरोपी ने फोन पर बताया कि फाइल कहीं रुक गई है। इसके लिए 1,53,980 रुपये लिए गए। कुछ दिन बाद आरोपी ने कहा कि फाइल सीनियर अफसर के यहां लंबित है।

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पांच दिसम्बर को उनके पास एक और व्यक्ति का फोन आया, जिसने फाइल क्लीयर कराने के लिए कहा। आरोपी ने कई तरह के बहाने बनाकर पीड़ित से कुल 2,24,680 रुपये ले लिए। बाद में मामला ठगी का निकला। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है।

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