World Music Day 2024: मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स का सामना कर रहे हैं तो म्यूजिक बनेगा सहारा, जानिए आपके मेंटल हेल्थ के लिए कैसे थेरेपी की तरह काम करता है म्यूजिक

ज्यादा से ज्यादा सफलता हासिल करने के चक्कर में आज कल हर कोई तनाव ग्रस्त है. सोशल मीडिया के इस दौड़ ने हमारी इनसिक्योरिटी को बढ़ा दिया है जिस वजह से बुरे स्तर पर जा कर एंग्जाइटी और डिप्रेशन जैसी गंभीर मानसिक समस्याएं भी होने लगती है. हमें पता ही नहीं चलता कि रोज के छोटे-छोटे तनाव कब इतने बड़े हो जाते हैं कि उसे संभालना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में खुद को मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए रोज थोड़ी बहुत कोशिश करनी होगी. म्यूजिक इसके लिए बेस्ट ऑप्शन है, आप इसे अपने डेली स्ट्रेस बस्टर की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं. रिसर्च और स्टडीज में भी माना गया है कि म्यूजिक हमारे मूड को बहुत जल्दी बेहतर कर देता है और हमारी मनोदशा पर पॉजिटिव असर डालता है.

 



मूड हो जाएगा बेहतर
म्यूजिक से मूड बहुत जल्दी बेहतर हो जाता है, बस जरूरी है तो सही चुनाव. अक्सर हम दुखी होने पर उदास गाने ही बजाते हैं और ऐसे में आपका मूड कभी भी बेहतर नहीं हो सकता है. जब भी आपको अच्छा महसूस न हो, कोई तनाव हो या आपका मन दुखी हो तो मूड को बेहतर करने के लिए एनर्जेटिक और हैप्पी म्यूजिक बजाए. इससे आपका मूड पल भर में बेहतर हो जाएगा.

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गानों से बूस्ट होगा कॉन्फिडेंस
गाना सुनने से न सिर्फ मूड बेहतर होता है बल्कि कॉन्फिडेंस बूस्ट करने में भी मदद मिलती है. 8 से 14 हर्ट्ज तक के अल्फा बीट्स के इस्तेमाल से दिमाग को ज्यादा शार्प और कॉन्फिडेंट स्थिति में लाया जा सकता है. नर्वस और डरा हुआ महसूस करने पर बाइनॉरल और आइसोक्रोनिक टोन का म्यूजिक सुनने की सलाह दी जाती है. ऐसा माना जाता है कि दिमाग बाइनॉरल बीट की फ्रीक्वेंसी के साथ तालमेल बिठाता है, जिससे हमारा ब्रेन ज्यादा खुश और आत्मविश्वासी होने के स्टेट में आ जाता है।

तनाव से मिलेगी राहत
मेडिटेशन म्यूजिक सुनने से तनाव कम होता है और आप मानसिक रूप से अधिक रिलैक्स महसूस कर पाते हैं. इसके अलावा नेचुरल म्यूजिक जैसे चिड़ियों की चहचहाहट, पियानो और गितार-सितार की धुन सुनने से भी तनाव कम होता है. नेचुरल म्यूजिक से दिमाग के साथ-साथ शरीर भी रिलैक्स हो जाता है.

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फोकस बढ़ाने में असरदार
गाने से आप अपना फोकस बढ़ा सकते हैं. अगर आपका मन में पढ़ाई में नहीं लग रहा है तो बिना लिरिक्स वाले गाने सुने. खासतौर पर सूथिंग धुन वाले मेडिटेशन सॉन्ग सबसे बेहतर होता है. कम आवाज में सुनते हुए भी आप पढ़ाई या कोई दूसरा काम कर सकते हैं. इससे किसी भी काम को करते वक्त आपका फोकस बढ़ जाएगा. रिसर्च में भी यह सिद्ध हुआ है कि 60 बीपीएम तक का क्लासिकल म्यूजिक सुनने से किसी भी इंफॉर्मेशन को प्रोसेस करने की दिमाग की क्षमता बढ़ जाती है.

निगेटिव इमोशन्स हो जाएंगे दूर
हमारी भावनाओं को प्रोसेस करने के लिए म्यूजिक एक बेहतरीन टूल की तरह काम कर सकता है. इसकी मदद से आप अपने निगेटिव इमोशन को भी संरचनात्मक ऊर्जा में बदल सकते हैं. गुस्से और तनाव में गाने सुनने से आपका तनाव थोड़ा कम होगा. आप अपने निगेटिव इमोशन का इस्तेमाल सकारात्मक रूप से कर पाएंगे.

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