धनतेरस कब है? क्या है धनतेरस का शुभ मुहूर्त? यहां जाने दीवाली से लेकर भाई दूज तक की तिथियां..

दुर्गा पूजा खत्म हो चुकी है और अब लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं दीवाली का। त्योहारों के सीजन का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार जिसे देशभर में व्यापक रूप से मनाया जाता है। भले ही दीवाली को देशभर के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नामों से पुकारा जाता हो, लेकिन इसे मनाने के उत्साह में जरा भी कमी नहीं आती है।



 

 

दीवाली सिर्फ एक दिन का त्योहार नहीं बल्कि कई दिनों तक चलने वाले त्योहारों का समूह है।
दीवाली का त्योहार धनतेरस से शुरू होता है भाई दूज पर खत्म होता है। हालांकि दीवाली के खत्म होते ही कई राज्यों में उतनी ही बेसब्री से छठ पूजा का इंतजार भी शुरू हो जाता है जितनी बेसब्री से दीवाली या धनतेरस का इंतजार किया जाता है।

 

 

चलिए आपको बताते हैं धनतेरस से लेकर भाई-दूज और छठ पूजा की सही तारीख और शुभ मुहूर्त :
1. धनतेरस कब है (When is Dhanteras)
हर साल कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार इस साल धनतेरस की त्रयोदशी तिथि 29 अक्तूबर 2024 (मंगलवार) को सुबह 10.31 बजे से शुरू होगी और 30 अक्तूबर 2024 (बुधवार) को दोपहर 1.15 बजे समाप्त होगी।
इस साल धनतेरस 29 अक्तूबर को मनायी जाएगी। धनतेरस की पूजा का शुभ मुहूर्त 29 अक्तूबर (मंगलवार) को शाम 6.31 से रात 8.13 बजे तक का है। यानी इस शुभ मुहूर्त के दौरान ही आप धनतेरस की पूजा और सोने-चांदी के सामान, स्टील-पीतल के बर्तन, झाड़ू आदि खरीद सकते हैं।

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2. छोटी दीवाली या नरक चतुर्दशी कब है (When is Narak Chaturdashi)
कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाने के अगले दिन यानी चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी अथवा छोटी दीवाली मनायी जाती है। इस साल नरक चतुर्दशी 30 अक्तूबर को मनायी जाएगी। इस साल नरक चतुर्दशी की तिथि 30 अक्टूबर को दोपहर 1.15 बजे से 31 अक्टूबर को दोपहर 3.52 बजे तक रहेगी।
हालांकि कुछ लोग उदया तिथि में होने की वजह से 31 अक्तूबर को भी नरक चतुर्दशी मनाएंगे। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नरक चतुर्दशी के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की मदद से नरकासुर का वध कर उसकी कैद से करीब 16 हजार कन्याओं को मुक्त करवाया था।

 

 

3. दीवाली-काली पूजा कब है (When is Diwali-Kali Puja)
पंचांग के अनुसार 31 अक्तूबर 2024 की दोपहर को 3.52 बजे से कार्तिक अमावस्या शुरू हो रही है। जो अगले दिन, 1 नवंबर तक रहेगी। लेकिन 31 अक्तूबर की रात को ही अमावस्या तिथि होने की वजह से उसी दिन दीवाली और काली पूजा की जाएगी।

 

दीवाली के दिन घरों और खास तौर पर व्यापारिक संस्थानों में जहां मां लक्ष्मी और विघ्नहर्ता गणेश की पूजा की जाती है वहीं पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा आदि राज्यों में इस दिन मां काली की पूजा का भी प्रचलन है। इस साल अयोध्या में भी बड़े धूम-धाम के साथ दीवाली मनायी जाएगी क्योंकि राम मंदिर में रामलला अथवा बालक राम की स्थापना के बाद इस साल पहली बार दीवाली मनायी जाने वाली है।

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4. गोवर्धन पूजा कब है (When is Gowardhan Puja)
भगवान इंद्र के प्रकोप से गोकुल वासियों की रक्षा करने के लिए श्रीकृष्ण ने अपने हाथों की छोटी ऊंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया था। इस तरह से उन्होंने लगभग 7 दिनों तक पूरे पर्वत को अपनी ऊंगली पर उठा रखा था। तब से ही दीवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा करने का प्रचलन शुरू हो गया है।

 

 

इस दिन अन्नकूट का भोग लगाया जाता है और श्रीकृष्ण के साथ-साथ गोवर्धन पर्वत की भी पूजा की जाती है। चूंकि 1 नवंबर को उदया तिथि में अमावस्या है, इसलिए गोवर्धन पूजा दीवाली के 1 दिन बाद यानी 2 नवंबर को मनायी जाएगी।
5. भैजा दूज कब मनायी जाएगी (When is Bhai Dooj)
इस साल भाई दूज अथवा भातृ द्वितीया उदया तिथि में 3 नवंबर को मनायी जाएगी। 2 नवंबर की शाम को 8.21 बजे से द्वितीया तिथि की शुरुआत होगी जो 3 नवंबर की रात को 10.05 बजे तक रहेगी। भाई की लंबी आयु और सफलता की कामना से बहनें 3 नवंबर की दोपहर 1.19 बजे से शाम 3.22 बजे के बीच शुभ मुहूर्त में अपने भाई को तिलक लगा सकती हैं। इसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है।

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छठ पूजा कब है (When is Chhath Puja)

दीवाली के ठीक 6 दिन बाद छठ पूजा होती है। इस साल लोकआस्था का महापर्व छठ पूजा 5 नवंबर को शुरू होगी। यह पर्व 4 दिनों तक चलता है। 8 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ छठ पर्व का समापन होगा। 5 नवंबर को नहाय खाए, 6 नवंबर को खरना, 7 नवंबर को अस्तलाचलगामी सूर्य को अर्घ्य और 8 नवंबर को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ महापर्व छठ संपन्न हो जाएगा।

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