Janjgir News : माता पिता की परिक्रमा से गणेशजी ने कर ली पृथ्वी की परिक्रमा, बनारी में आयोजित हो रही शिव महापुराण की कथा

जांजगीर चाम्पा. ग्राम बनारी में तिवारी परिवार द्वारा आयोजित शिव महापुराण की कथा के छठवें दिन व्यास आचार्य मनोज पांडेय ने शिव पार्वती विवाह और गणेश, कार्तिकेय जन्म की कथा का वर्णन किया।
आचार्य पांडेय ने कहा कि भगवान शिव जी परब्रह्म स्वरूप हैं। हिंदू धर्म में, सनातन धर्म में बहु देव वाद होते हुए भी एकेश्वर वाद है। हिंदू धर्म में ब्रह्म एक ही है,लेकिन उनके पांच स्वरूप सगुण रूप में प्रकट होते हैं ।इनमें पहला भगवान विष्णु जी, दूसरे भगवान सूर्य जी, तीसरे में भगवती शक्ति, चौथे गणेश जी और पांचवें भगवान शिव जी। यह पांचो देव ब्रह्म की शक्तियों से संपन्न है, परिपूर्ण है। सृष्टि के तीनों कार्य सृष्टि, स्थिति और विनाश ये तीनों को करने में यह पांचो समर्थ हैं ।



आचार्य श्री ने कहा कि भगवान शिव जी का परिवार अद्भुत है, उनके परिवार में ब्रह्म के तीन स्वरूप हैं। स्वयं शिवजी, भगवान गणेश जी और माता पार्वती जी । किसी किसी ग्रंथ में ब्रह्म का छठा स्वरूप कार्तिकेय जी को माना गया है। तो इस प्रकार ब्रह्म के छह स्वरूप में से चार भगवान शिव जी के ही परिवार में हैं। उन्होंने बताया कि भगवान शिव जी और पार्वती जी के विवाह के पश्चात कार्तिकेय जी और गणेश जी पुत्र रूप में प्रकट होते हैं । गणेश जी और कार्तिकेय जी में प्रतिस्पर्धा का आयोजन हुआ। भगवान शिव ने कहा कि तुम दोनों में जो पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके वापस आएगा उसी का विवाह पहले होगा । कार्तिकेय जी अपने वाहन मयूर पर सवार होकर परिक्रमा करने शीघ्रता से चल पड़े, परंतु स्थल गणेश जी ने माता-पिता अर्थात शिव पार्वती जी को एक शिला पर बिठाकर के पूजन कर उनकी ही परिक्रमा कर ली और कहा की जो पुत्र माता-पिता की परिक्रमा करते हैं उन्हें पृथ्वी की परिक्रमा करने का संपूर्ण तीर्थ की परिक्रमा करने का फल प्राप्त हो जाता है, तो मैं आप दोनों की परिक्रमा कर पृथ्वी की परिक्रमा कर ली है और अब आप मेरा विवाह कर दीजिए तो भगवान शंकर जी ने सहमति देते हुए गणेश जी का विवाह पहले करवा दिया ।

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श्री पांडेय ने कहा कि इससे माता-पिता की महिमा प्रकट होती है। हम सभी को भी अपने घरों में विद्यमान प्रत्यक्ष देवता माता और पिता की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। घर के देवता माता-पिता दुखी हो, उपेक्षित हो, तो तीर्थ यात्रा करना भी व्यर्थ है। कथा श्रवण करने मुकेश मां श्रीमती आशा कृष्णकांत तिवारी के साथ जगदीश तिवारी, विजय तिवारी, सत्यप्रकाश तिवारी, राकेश तिवारी, रमाकांत तिवारी, राजेश तिवारी, कमलकांत तिवारी,दीपक तिवारी, माधव प्रसाद पाण्डेय, जीवराखन तिवारी, राकेश पाण्डेय, लक्ष्मीकांत पाण्डेय, मनमोहन दुबे, गोरेलाल मिश्रा, रामेश्वर साव, बोधराम धीवर सहित परिवार के सदस्य और श्रद्धालु जन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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