



चाम्पा. ग्राम बहेराडीह में बिहान की पशु सखी पुष्पा यादव, यहां की महिलाओं को मचान पद्धति से सब्जी लगाने की घर-घर जाकर जानकारी दे रही है और उन्होंने खुद अपने घर के पीछे की बाड़ी में चार प्रकार के मचान बनाकर सब्जी का जैविक पद्धति से खेती कर रही हैं। 
इस सम्बन्ध में बलौदा ब्लॉक के कुरदा कलस्टर अंतर्गत जाटा पंचायत के आश्रित ग्राम बहेराडीह की बिहान की पशु सखी पुष्पा यादव ने बताया कि मचान पद्धति वह तरीका है, जिसमें बेल वाली सब्जियों को ज़मीन पर फैलाने के बजाय ऊपर सहारे (मचान) पर चढ़ाकर उगाई जाती है। इससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और उत्पादन अच्छा होता है। मचान पद्धति में उगाई जाने वाली लौकी, तोरई, करेला, कद्दू, खीरा, सेम, परवल, टिंडा, कुंदरू, पोइ भाजी आदि सब्जी की फ़सल ली जा सकती है।
मचान कैसे बनाएं…
पशु सखी पुष्पा यादव ने बताया कि मचान बनाने के लिए बाँस / लकड़ी के खंभे,तार या रस्सी,जूट की डोरी की जरुरत होती है। मचान की ऊँचाई ज़मीन से लगभग 5–7 फीट ऊँचा होना चाहिए। वहीं उनकी ढांचा खेत या क्यारी में 6–8 फीट की दूरी पर खंभे गाड़ना होता है और ऊपर बाँस या तार से जाल जैसा ढांचा बनाना चाहिए। उन्होंने खेती में बीज बुआई की विधि के बारे में बताया कि बीज सीधे खेत में या नर्सरी में तैयार पौधे लगायें. जिसकी दूरी पौधे से पौधे की दूरी 1–1.5 मीटर रखना चाहिए और खाद के रूप में गोबर की सड़ी खाद / वर्मी कम्पोस्ट मिलाना होता है। इसके साथ ही हल्की और नियमित सिंचाई करना चाहिए।
मचान पद्धति के लाभ…
पशु सखी पुष्पा यादव ने मचान पद्धति के लाभ के बारे में बताया कि फल साफ और सुंदर होते हैं
रोग व कीट कम लगते हैं
हवा और धूप अच्छी मिलती है
प्रति पौधा उत्पादन अधिक होता है
तोड़ाई (कटाई) आसान होती है सावधानियाँ के बारे में बताया कि मचान मजबूत होना चाहिए
बेलों को समय-समय पर ऊपर चढ़ाते रहें और पानी भराव न होने दें।


