JanjgirChampa News : आंगनवाड़ी शिक्षिकाओं का सम्मेलन सम्पन्न, बच्चों के सर्वांगीण विकास पर हुआ मंथन

पामगढ़. पामगढ़ परियोजना की आंगनवाड़ी शिक्षिकाओं की टीचर कॉफ्रेंस सद्भावना भवन, पामगढ़ में आयोजित किया गया। यह आयोजन एकीकृत बाल विकास परियोजना, पामगढ़, एवं अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन, जांजगीर-चांपा के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस सम्मेलन में बाल विकास के पाँच आयामों- शारीरिक, मानसिक, रचनात्मक, सामाजिक, भावनात्म एवं नैतिक विकास को केंद्रित करते हुए शिक्षिकाओं ने अपने कार्यों को विस्तृत रूप से प्रस्तुत किया। इस सम्मेलन में अस्सी से अधिक आंगनवाड़ी शिक्षिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और जाना कि कैसे बच्चों के साथ निरंतर गतिविधि आधारित कार्य करने से वे बहुत ही सहजता के साथ सीखते हैं।

 



कार्यक्रम का शुभारंभ गैलरी भ्रमण से हुआ। परियोजना अधिकारी रवि कुमार शर्मा ने मॉडल आंगनवाड़ी कैसा हो सकता है , का अवलोकन किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी शिक्षिकाएँ समाज की मजबूत नींव हैं, जिनके कंधों पर देश के भविष्य का निर्माण टिका है। वे अपने कार्यों से निरंतर अपनी भूमिकाओं का निर्वहन कर रही हैं।

मानसिक विकास पर प्रकाश डालते हुए खेल-खेल में शिक्षा, कहानियों और रचनात्मक गतिविधियों को शामिल करते हुए शिक्षकाओं ने अपने-अपने कार्यों को प्रस्तुत किया। प्रिंट रिच के संदर्भ में आंगनवाड़ी शिक्षिका कृष्णा कश्यप ने अपने कार्यों को प्रस्तुत किया। प्रिंट रिच यानी पोस्टर के रंगे-विरंगे चित्रों एवं अक्षरों को देखकर वे बहुत ही आसानी से सीखते हैं ।ये नन्हें बच्चे शब्दों से अधिक चित्रों से अपना जुड़ाव महसूस करते हैं।

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शिक्षिकाओं ने अनुभव साझा किया कि जब कोई बच्चा अपने नन्हें हाथों से अपने हुनर को कागज पर उतारता है और पहली बार जब अक्षर पहचानता है, तो वह पल उनके लिए अविस्मरणीय बन जाता है। आंगनवाड़ी शिक्षिका शैल श्रीवास्तव ने सामाजिक विकास विषय पर समूह गतिविधियों, सहयोग और आपसी सम्मान की भावना बच्चों में कैसे विकसित होता को प्रस्तुत किया। साथ ही रंग एवं संख्या पहचान को केंद्रित करते हुए आंगनवाड़ी केंद्र में किए गए कार्यों एवं बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को प्रस्तुत किया।

शिक्षिकाओं ने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों को सिर्फ शिक्षा ही नहीं, बल्कि समाज में जीने की कला भी सिखाते हैं।
अंतिम सत्र में नैतिक विकास पर चर्चा हुई, जिसमें बच्चों में ईमानदारी, अनुशासन, एक दूसरे का सहयोग, अपनी बारी का इंतजार करना जैसे संस्कारों का बीजारोपण भी बहुत ही सहजता से किया जाता है। अच्छे नागरिक बनने का पहला चरण आंगनवाड़ी से ही शुरू होता है।

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कार्यक्रम के समापन पर बोलते हुए परियोजना अधिकारी ने कहा कि प्रिंट रिच के माध्यम से बच्चों के साथ दीवारें भी बोलने लगती हैं। जब बच्चे और दीवारें साथ मिलकर बोलती हैं तो हमारे आंगनवाड़ी का माहौल सीखने-सिखाने के लिए बहुत ही उपयोगी हो जाता है। यह पूरा कार्यक्रम जिला परियोजना अधिकारी अनीता अग्रवाल के मार्गदर्शन में हुआ। सम्मेलन के समापन पर अपने कार्यों को प्रस्तुत करने वाली सातों शिक्षिकाओं पूनम साहू, ललिता खरे, शैल पटेल, कृष्णा कश्यप, धनेश्वरी, पुष्पा बर्मन एवं शैल श्रीवास्तव को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

परियोजना की सभी सेक्टर पर्यवेक्षक योग्यता तिवारी, ममता पटेल, सरिता अंचल, गिरिजा धिरही, संतोषी देवांगन, प्रियंवदा, मनीषा जांगड़े की उपस्थिति में कार्यक्रम का सफल आयोजन हुआ। पर्यवेक्षक प्रियंवदा ने सभी का धन्यवाद ज्ञपित किया। आंगनवाड़ी शिक्षिकाओं ने बताया कि उनके लिए इस तरह का यह पहला अनुभव है। यह सम्मेलन न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि आंगनवाड़ी शिक्षिकाओं के मन में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और अपने कार्य के प्रति गर्व की भावना भर गया।

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