Baheradih News : पशुओं के लिए सर्वोत्तम आहार है अंजोला घास, जिले के किसानों को अंजोला के प्रति जागरूक कर रहीं क़ृषि सखी व पशु सखी दीदियां

जांजगीर-चाम्पा. अंजोला एक प्रोटीन युक्त, कम लागत और बहुपयोगी जल पौधा है, जो पशुपालन और जैविक खेती दोनों के लिए लाभकारी है. ये कहना है, बलौदा ब्लॉक अंतर्गत कुरदा कलस्टर के ग्राम बहेराडीह की पशु सखी पुष्पा यादव और जाटा गांव की क़ृषि सखी शशि कर्ष का.

 



उन्होंने बताया अंजोला के पत्तों में एक सूक्ष्म शैवाल (सायनोबैक्टीरिया) सहजीवी रूप में रहता है, जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करता है. इसी वजह से अजोला को जैव उर्वरक और पशु आहार, दोनों रूपों में उपयोग किया जाता है. अंजोला की मुख्य विशेषता के बारे में बताया कि बहुत तेज वृद्धि (7–10 दिन में दोगुना),कम लागत में उत्पादन किया जा सकता है.

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बहेराडीह के कृषक मित्र दीनदयाल यादव ने बताया कि पशु, बकरी, सूकर, मुर्गी के लिए उत्तम पूरक आहार माना जाता है. अ₹अंजोला में कई प्रकार की पोषक तत्व पाया जाता है, जिसमें प्रोटीन, वसा, कार्बोहाईड्रेट,, फाइबर, कैल्शियम, फोस्फोरास आयरन, मैग्नेशियम, पोटेशियम, बिटा कैरोटिन, और अन्य विटामिन विद्यमान होता है.

अंजोला का उपयोग –
बकरी : 300–500 ग्राम, मुर्गी : 20–30 ग्राम (अंडा उत्पादन व पीला रंग बेहतर), सूकर : 1 किग्रा तक पूरक रूप में किया जा सकता है.

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धान की खेती में जैव उर्वरक के रूप में मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक रासायनिक नाइट्रोजन की बचत अंजोला एक प्रोटीन युक्त, कम लागत और बहुउपयोगी जल पौधा है, जो पशुपालन और जैविक खेती दोनों के लिए लाभकारी है.
डॉ. केडी महंत
मृदा वैज्ञानिक व वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रमुख, क़ृषि विज्ञान केंद्र जांजगीर

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