सिर्फ एक साल स्‍कूल गए और लिख डाला अमेरिका का इतिहास, पढ़िए अब्राहम लिंकन की अनसुनी प्रेरक कहानी

नई दिल्ली. दुनिया के इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व हुए हैं जिन्होंने न केवल अपने देश का भाग्य बदला, बल्कि पूरी मानवता को एक नई दिशा दी। अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन एक ऐसा ही नाम है। एक साधारण गरीब किसान परिवार में जन्मे लिंकन ने अपने दृढ़ निश्चय से अमेरिका को उसके सबसे कठिन दौर यानी ‘गृहयुद्ध’ से बाहर निकाला और देश को टूटने से बचाया।



आज हम आपको उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में बताने वाले हैं। आइए जानते हैं कैसा था लिंकन का जीवन।

बचपन का संघर्ष और शिक्षा का जुनून
1809 को केंटकी में जन्मे लिंकन का शुरुआती जीवन अभावों में बीता। गरीबी और दास प्रथा के कारण उनके परिवार को कई बार स्थान बदलना पड़ा। जब वे महज 9 वर्ष के थे, तब उनकी मां का निधन हो गया और उनके पिता ने एक साल बाद सारा बुश जॉनस्टन से दूसरी शादी कर ली। लेकिन लिंकन के भीतर छिपी ललक को उनकी सौतेली मां सारा ने ही पहचाना और पढ़ने के लिए प्रेरित किया।

इसे भी पढ़े -  Rudraksha Rules: रुद्राक्ष धारण करने से पहले सावधान! जानें असली और नकली में फर्क

हालांकि, उनके पिता पढ़े-लिखे नहीं थे और बेटे का यूं किताबों में डूबा रहना उन्हें पसंद नहीं आ रहा था। गरीबी और पिता का साथ न मिलने की वजह से लिंकन को सिर्फ एक साल ही औपचारिक शिक्षा मिल सकी, लेकिन अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने खुद से पढ़ना-लिखना सीखा और 1836 में वकालत की डिग्री हासिल की।

न्यू सलेम से राजनीति का उदय
लिंकन के राजनीतिक जीवन की नींव न्यू सलेम में पड़ी। 1831 में एक नाव यात्रा के दौरान वे इस जगह पहुंचे और यहीं बस गए। यहीं से उन्होंने व्हिग पार्टी के साथ जुड़कर राजनीति में कदम रखा। अपनी ईमानदारी और साफ छवि के कारण वे चार बार इलिनोइस विधानसभा के सदस्य चुने गए। 1837 में उन्होंने स्प्रिंगफील्ड में वकालत शुरू की और 1847 में अमेरिकी कांग्रेस तक पहुंचे।

दास प्रथा के खिलाफ आवाज
कुछ समय के लिए सक्रिय राजनीति से दूर रहने के बाद, 1854 में कंसास नेब्रास्का कानून के विरोध में लिंकन फिर से मैदान में उतरे। उन्होंने दास प्रथा के खिलाफ पुरजोर आवाज उठाई, जिसने उन्हें रिपब्लिकन पार्टी का मुख्य चेहरा बना दिया। 1858 में स्टीफन डगलस के साथ हुए ऐतिहासिक वाद-विवादों ने उन्हें पूरे अमेरिका में एक कद्दावर नेता के रूप में पहचान दिलाई।

इसे भी पढ़े -  Sakti News : 'मोर गांव की बेटी, मोर स्वाभिमान योजना' के तहत सरपंच चन्द्र कुमार सोनी की अनुकरणीय पहल, गांव में विवाह हो रही बेटियों को 31-31 सौ रुपये की भेंट

राष्ट्रपति पद और गृहयुद्ध की अग्निपरीक्षा
साल 1860 में अब्राहम लिंकन अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति चुने गए, लेकिन उनकी यह जीत चुनौतियों से भरी थी। उनकी जीत के विरोध में सात दक्षिणी राज्यों ने अलग होने की घोषणा कर दी, जिससे 1861 में अमेरिका में गृहयुद्ध छिड़ गया। ऐसे में बिना किसी अनुभव के लिंकन ने सेना का नेतृत्व किया।

1863 में उन्होंने ऐतिहासिक एमांसिपेशन प्रोक्लेमेशन लागू किया। इस कदम ने गृहयुद्ध को केवल संघ बचाने की लड़ाई न रखकर इसे मानवता और दास प्रथा के अंत के एक नैतिक उद्देश्य से जोड़ दिया।

एक महान नायक का अंत
लिंकन ने अमेरिका को एकता के सूत्र में पिरोया और लोकतंत्र को मजबूती दी, लेकिन इसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। 14 अप्रैल 1865 को वॉशिंगटन डीसी के फोर्ड थिएटर में एक नाटक के दौरान दक्षिणपंथ समर्थक अभिनेता जॉन विल्क्स बूथ ने उनके सिर पर गोली मार दी। इसके बाद उन्हें पीटरसन हाउस लाया गया, लेकिन अगले दिन, 15 अप्रैल 1865 को इस महान नेता ने दुनिया को अलविदा कह दिया।

इसे भी पढ़े -  JanjgirChampa News : बनारी गांव में नशामुक्त एवं बाल विवाह मुक्त अभियान के तहत नुक्कड़ नाटक आयोजित, बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत की दिलाई गई शपथ, युवोदय के स्वयंसेवक ने निभाई सहभागिता

error: Content is protected !!