Rudraksha Rules: रुद्राक्ष धारण करने से पहले सावधान! जानें असली और नकली में फर्क

नई दिल्ली. रुद्राक्ष को साक्षात भगवान शिव का अंश माना गया है। ‘रुद्र’ और ‘अक्ष’ से मिलकर बने इस शब्द का मतलब है – शिव के आंसू। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब महादेव ने जगत के कल्याण के लिए हजारों सालों तक समाधि के बाद अपनी आंखें खोलीं, तो उनके नेत्रों से गिरे आंसुओं से रुद्राक्ष के वृक्ष की उत्पत्ति हुई। रुद्राक्ष को केवल धार्मिक प्रतीक ही नहीं, बल्कि एक सुरक्षा कवच के रूप में भी पहना जाता है।

 



लेकिन बाजार में बड़ी मात्रा में नकली रुद्राक्ष बेचे जा रहे हैं। इसलिए रुद्राक्ष की पहचानकर ही उसको धारण करें। आइए जानते हैं असली और नकली रुद्राक्ष में फर्क करने के सबसे सरल और सटीक तरीके।

असली रुद्राक्ष पहचानने के 3 तरीके 
पानी में तैराकर: यह सबसे पुराना तरीका है। एक गिलास साफ पानी लें और रुद्राक्ष को उसमें डालें। असली रुद्राक्ष ठोस और भारी होता है, इसलिए वह पानी में डूब जाता है। अगर रुद्राक्ष लकड़ी या प्लास्टिक का बना है, तो वह पानी के ऊपर तैरने लगेगा। हालांकि कई बार बहुत ज्यादा पुराने और सूखे हुए असली रुद्राक्ष भी तैर सकते हैं, इसलिए अन्य टेस्ट भी जरूर करें।

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गर्म पानी से: रुद्राक्ष को करीब 20-30 मिनट तक उबलते हुए पानी में डालें। असली रुद्राक्ष पर उबलते पानी का कोई असर नहीं होता, वह अपना रंग नहीं छोड़ता। अगर रुद्राक्ष पर गोंद या रंग लगाकर दो हिस्सों को चिपकाया गया है, तो वह उबलते पानी में अलग हो जाएगा या उसका रंग उतरने लगेगा।

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तांबे के सिक्के से: रुद्राक्ष में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक गुण होते हैं। अगर आप दो तांबे के सिक्कों के बीच रुद्राक्ष को रखते हैं और हल्का सा दबाव देते हैं, तो असली रुद्राक्ष में थोड़ी सी हलचल महसूस होती है या वह हल्का सा घूमने लगता है।

रुद्राक्ष धारण करने के नियम
रुद्राक्ष धारण करने से पहले इसे गंगाजल या कच्चे दूध से शुद्ध करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें।
श्मशान घाट जाते समय या मांस-मदिरा का सेवन करते समय रुद्राक्ष को उतार देना चाहिए।

रुद्राक्ष को लाल या पीले रेशमी धागे में पहनना सबसे अच्छा माना जाता है। आप इसे सोने या चांदी में भी जड़वा सकते हैं।
अपने पहने हुए रुद्राक्ष को किसी दूसरे के साथ साझा न करें।

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