



जांजगीर-चाम्पा. शिवरीनारायण क्षेत्र के बेल्हा गांव की महिलाएं मिसाल बन गई हैं और गांव में नशाबन्दी कर दी है. बेल्हा गांव में ना कोई शराब बेचता और ना गांजा. महिलाओं की कोशिश रंग लाई है और 9 महीने से गांव में नशाबन्दी है. महिलाओं के इस प्रयास को सरपंच हेमप्रसाद भारद्वाज के साथ सभी ग्रामीणों का समर्थन मिला है. नशाबंदी के बाद बेल्हा गांव, शांति का गांव बन गया है. पहले घर-घर में झगड़ा होता था, पति-पत्नी में शराबखोरी से विवाद होता था और थाना भी मामला पहुंचता था, लेकिन महिलाओं द्वारा नशाबंदी करने के बाद बेल्हा गांव का माहौल शांत हो गया है. इस बार होली में कोई विवाद नहीं हुआ. पहले शराबखोरी की वजह से महिलाएं, छीटाकशी की शिकार भी होती थीं, लेकिन अब महिलाओं को कोई दिक्कत नहीं होती.
इतना जरूर है कि महिलाओं ने 1 साल पहले उमंग ग्राम संगठन बनाकर जब अभियान छेड़ा था तो जरूर उन्हें दिक्कतें आईं, लेकिन लोगों ने नशाखोरी के नुकसान को समझा और महिलाओं के अभियान को समर्थन दिया. फिर क्या था, बेल्हा गांव में 3 महीने में नशाबन्दी हो गई. गांव में पहले कई लोग शराब बेचते थे, लेकिन अब कोई भी शराब नहीं बेचता. बेल्हा गांव की महिलाओं की कोशिश का नतीजा है कि दूसरे गांव की महिलाएं भी इनके कार्यों को देखकर जागरूक हो रही हैं और अन्य गांवों में भी नशाबन्दी करने की ‘लौ’ जल चुकी है. इस तरह बेल्हा गांव की महिलाओं की पहल की जिले में जमकर तारीफ हो रही है, क्योंकि सभी जानते हैं, नशा, नाश की जड़ है. यही वजह है कि बेल्हा गांव की महिलाओं ने नशाबन्दी कर जो मिसाल पेश की है, उसकी खूब चर्चा हो रही है.
तत्कालीन टीआई भास्कर शर्मा की महिलाओं व ग्रामीणों ने तारीफ की
शिवरीनारायण के तत्कालीन टीआई भास्कर शर्मा की बेल्हा की महिलाओं व ग्रामीणों ने तारीफ की है. मीडिया से बात करते कहा कि भास्कर शर्मा जब शिवरीनारायण टीआई थे तो उन्होंने नशाबंदी करने की दिशा में काफी सपोर्ट किया. जब-जब उन्हें गांव बुलाया गया, वे पहुंचे और लोगों में समन्वय बनाने में उन्होंने पहल की. इस तरह महिलाओं को नशाबंदी करने की दिशा में टीआई का सपोर्ट किया, इसलिए महिलाओं व ग्रामीणों ने तत्कालीन टीआई भास्कर शर्मा की तारीफ की है.





