बाइक्स में क्यों होते हैं 2 या 4 साइलेंसर? सिर्फ स्टाइल नहीं, इसके पीछे छिपा है ये बड़ा राज

जब आप सड़क पर दो या 4 साइलेंसर वाली स्पोर्ट्स बाइक देखते हैं तो वो सिर्फ दिखावे के लिए नहीं होते। इसके पीछे कई सारी वजहें होती हैं। दरअसल, इसके पीछे बहुत ही कमाल की इंजीनियरिंग और तकनीक छिपी होती है। आइए समझने की कोशिश करते हैं कि क्यों कंपनिया एक से ज्यादा साइलेंसर लगाती हैं।



क्या है साइलेंसर का असली काम?
साइलेंसर का सबसे बड़ा काम इंजन के शोर को कम करना है। इसके अंदर खास तरह का नलियां और चैंबर होते हैं जो इंजन से निकलने वाली कान फोड़ने वाली आवाज को सोख लेते हैं। इंजन में जब पेट्रोल जलता है तो बहुत सी जहरीली गैसें बनती हैं। साइलेंसर इन गैसों को सेफ तरीके से बाहर निकालने में मदद करता है।

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साइलेंसर सिर्फ शोर ही कम नहीं करता बल्कि यह इंजन को सांस लेने में मदद करता है। अगर साइलेंसर सही हो तो बाइक और भी स्मूद चलती है और उसकी परफॉर्मेंस बढ़ जाती है।

क्यों होते हैं 2 साइलेंसर?
बड़ी बाइक्स में 2 साइलेंसर इंजन होते हैं। दो साइलेंसर होने से इंजन की गर्म गैसें 2 अलग-अलग रास्तों से बाहर निकलती हैं। इससे इंजन पर कम दबाव पड़ता है और वह अच्छे से सांस ले पाता है। 2 पाइप होने की वजह से गर्मी आपस में बंट जाती हैं तो इससे साइलेंसर और इंजन के बहुत ज्यादा गर्म होने का खतरा कम हो जाता है।

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क्या है 4 साइलेंसर का फायदा?
जब बाइक का इंजन बहुत ज्यादा पावरफुल होता है तो वह बहुत ज्यादा पावरफुल होता है तो वह बहुत ज्यादा धुआं और गैस पैदा करता है। 4 साइलेंसर होने से यह गैस बिना किसी रुकावट के तुरंत बाहर निकल जाती है। इससे इंजन अपनी पूरी ताकत के साथ काम कर पाता है।

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4 साइलेंसर वाली बाइक की आवाज बहुत अलग और भारी होती है। कंपनियां इसे तरह डिजाइन करती हैं कि दूर से ही पता चल जाए कि कोई सुपरबाइक आ रही है। इसे बाइक की सिग्नेचर साउंड कहते हैं।

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