CG Jaggi Case News : रुद्राक्ष की माला से खुला था जग्गी हत्याकांड का राज, ऐसे साबित हुई अमित जोगी की संलिप्तता, जानिए कौन थे NCP नेता रामावतार?

रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद प्रदेश ने कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखें, लेकिन 4 जून 2003 की तारीख को जग्गी परिवार को जो जख्म मिला, आज भी नहीं भरे हैं। रायपुर के जाने-माने कारोबारी और एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की सरेराह हत्या ने न केवल राजधानी को दहला दिया था, बल्कि तत्कालीन अजीत जोगी सरकार के लिए भी बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी थीं। यह छत्तीसगढ़ का पहला हाई-प्रोफाइल राजनीतिक हत्याकांड माना जाता है।

 



दरअसल, 4 जून 2003 को राजधानी रायपुर के मौदहापारा इलाके में पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के सबसे भरोसेमंद और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कोषाध्यक्ष रामावतार जग्गी की हत्या कर दी गई थी। 2003 में विधानसभा चुनाव का माहौल था और जग्गी रायपुर में शरद पवार की एक विशाल रैली की तैयारियों में जुटे थे। 4 जून की रात जब वे अपनी कार से जा रहे थे, तभी रायपुर के मौदहापारा इलाके में तीन बाइकों और दो कारों पर सवार हमलावरों ने उन्हें घेर लिया। हमलावरों ने पहले उनकी गाड़ी में तोड़फोड़ की और फिर बेहद करीब से उन पर गोलियां बरसा दीं।

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Amit Jogi Sentence रुद्राक्ष की माला उतार कर हत्या
इस हत्याकांड में एक हैरान करने वाली बात यह थी कि हमलावरों ने जग्गी के गले से रुद्राक्ष की माला उतार ली थी, जो बाद में इस पूरे केस की जांच में सबसे अहम कड़ी साबित हुई। घायल हालत में जग्गी को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना ने पूरे राज्य के चुनावी समीकरणों को बदलकर रख दिया था।

Ajit Jogi घटना से कैसे जुड़े जोगी परिवार के तार ?
दावा किया जाता है कि शुरुआत में पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मर्डर को महज़ लूट की घटना बताई थी, लेकिन जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी पर हत्याकांड की साजिश रचने का आरोप लगाया है। रामवतार के बेटे सतीश जग्गी का दावा है कि जब उन्होंने इसकी रिपोर्ट पुलिस में लिखवाई तो दूसरे दिन ही एफआईआर को शून्य घोषित कर दिया। सत्ता परिवर्तन के बाद बीजेपी की सरकार आई और तो सतीश ने सीबीआई जांच की मांग की और केंद्रीय एजेंसी को जांच सौंपा गया। जांच के बाद 2004 में सीबीआई ने 29 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।

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2007 में अमित जोगी हुए थे बरी
इसके बाद 2007 में रायपुर की विशेष अदालत ने 28 आरोपियों को तो सजा सुनाई लेकिन अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। इसके बाद सतीश जग्गी ने यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाया। नवंबर 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को बेहद गंभीर माना और इसे फिर से मेरिट के आधार पर सुनवाई के लिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट भेज दिया।

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23 साल बाद उम्रकैद की सजा
2 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की बेंच ने अमित जोगी को भी इस हत्याकांड का दोषी करार दिया और सरेंडर करने का आदेश दिया। हालांकि सजा का ऐलान नहीं किया गया था। इसके बाद 6 अप्रैल 2026 को अदालत ने अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुना दी है। अमित जोगी ने इस फैसले के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

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