जांजगीर-चाम्पा. खेतों में धान की कटाई के बाद बचने वाली पराली को जलाने के बजाय उसका सदुपयोग कर किसान अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। पराली से मशरूम उत्पादन करने के साथ ही मशरूम की खेती के बाद बचे अवशेषों से जैविक खाद तैयार की जा सकती है। इससे एक ओर जहां पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर किसानों को आय का एक अतिरिक्त साधन भी मिल सकता है।








इसी उद्देश्य से बहेराडीह स्थित भारत के पहले किसान स्कूल में मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को पराली के उपयोग से मशरूम उत्पादन करने, उत्पादन की विभिन्न प्रक्रियाओं तथा मशरूम की खेती के बाद बचे अवशेषों का उपयोग जैविक खाद बनाने में करने की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण में वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि धान की पराली किसानों के लिए अनुपयोगी कचरा नहीं, बल्कि एक उपयोगी कृषि संसाधन है। उचित विधि से पराली का उपचार कर उससे ढींगरी (ऑयस्टर) मशरूम का उत्पादन किया जा सकता है। इसके लिए पराली की सफाई, काटने, उपचार करने, बीज डालने तथा उचित तापमान और नमी बनाए रखने जैसी प्रक्रियाओं की जानकारी होना आवश्यक है।
पराली से मशरूम, अवशेषों से जैविक खाद
किसान स्कूल में किसानों को समझाया गया कि मशरूम उत्पादन के बाद बचे पराली के अवशेषों का उपयोग उचित तरीके से कम्पोस्ट या अन्य जैविक खाद तैयार करने में किया जा सकता है। तैयार खाद का उपयोग खेतों में मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और जैविक पदार्थ बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। इस प्रकार पराली का बेहतर उपयोग कर किसान कृषि अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदल सकते हैं।
पर्यावरण संरक्षण के साथ बढ़ सकती है किसानों की आमदनी
किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करना और कृषि अवशेषों से आय बढ़ाने के वैकल्पिक उपायों की जानकारी देना रहा। मशरूम उत्पादन कम जगह में भी शुरू किया जा सकता है। इच्छुक किसान उचित प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण मशरूम बीज तथा बाजार की उपलब्धता को ध्यान में रखकर इसे कृषि आधारित उद्यम के रूप में अपना सकते हैं। किसान स्कूल के माध्यम से किसानों को खेती में नवाचार अपनाने, कृषि अवशेषों का सदुपयोग करने तथा कम लागत में अतिरिक्त आय के अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
किसान स्कूल द्वारा किसानों को संदेश दी जा रही है कि पराली न जलाएं, इससे मशरूम उगाएं और बचे अवशेषों से जैविक खाद बनाकर खेती को लाभकारी एवं पर्यावरण के अनुकूल बनाएं।



