सूरज से निकलेंगी भयानक लपटें, खाक हो जाएंगे उपग्रह, अंधेरे में डूब जाएगी धरती : वैज्ञानिक… डिटेल में पढ़िए…

अंतरराष्‍ट्रीय वैज्ञानिकों के एक दल ने चेतावनी दी है कि सूरज जहां धरती के जीवों के लिए ऊर्जा का स्रोत है, वहीं यह हमारे लिए तबाही का सबब भी बन सकता है। एक ताजा शोध में वैज्ञानिकों ने कहा कि सूरज से निकला महाविनाशक तूफान इंसानियत को अंधेरे के युग में वापस भेज सकता है। इससे कई हजार सालों में हुआ इंसानी विकास खत्‍म हो जाएगा। वैज्ञानिकों ने इसी तरह की अद्भुत घटना को धरती से 100 प्रकाश वर्ष की दूरी पर देखा है।

 



यह सौर तूफान शानदार आतिबाजी की तरह से नजर आ रहा है और वैज्ञानिकों ने इसे ‘चिंताजनक’ करार दिया है। वैज्ञानिकों ने अपने शोध में कहा क‍ि इस तरह की विनाशक सौर लपटें धरती को भी निशाना बना सकती हैं। उन्‍होंने कहा कि यह उपग्रहों को जलाकर राख कर देगा और पूरे शहर के पावर ग्रिड बर्बाद हो जाएंगे। इससे दुनिया में हर तरफ अंधेरा छा जाएगा और फोन नेटवर्क काम करना बंद कर देंगे।

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जानें क्‍या होता है कोरोनल मास इजेक्शन
इस सितारे को EK Draconis नाम दिया गया है, जिसका मतलब ड्रैगन होता है। यह ड्रैगन की तरह से आग उगल रहा है। यह उत्‍तरी आकाश में ड्रेको तारामंडल में स्थित है। कोरोनल मास इजेक्शन (CME) सूरज के बाहरी वायुमंडल में होने वाले विस्फोट के कारण पैदा हुए प्लाज्मा पार्टिकल्स के उत्सर्जन को कहते हैं। यह अक्‍सर होता रहता है और बहुत तेजी से अंतरिक्ष में एक-जगह से दूसरी जगह पर पहुंचता है।

ये सौर तूफान धरती के लिए बहुत ही बुरी खबर है क्‍योंक‍ि प्र‍त्‍येक 100 साल या उसके बाद में ये तूफान धरती की ओर निकलते हैं। इस शोध को करने वाले अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो के शोधकर्ता डॉक्‍टर यूता नोत्‍सू ने कहा कि सीएमई का धरती और मानव समाज पर बहुत गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इस शोध को करनी वाली अंतरराष्‍ट्रीय टीम ने पाया कि EK Draconis सितारे की ओर भयानक ऊर्जा जा रही है। साथ ही अब तक जितनी सौर लपटें देखी गई हैं, उनसे यह ज्‍यादा शक्तिशाली है।

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धरती की मैग्नेटिक फील्ड सौर तूफानों से करती है रक्षा
विशेषज्ञों को भय है कि यह विनाशक लपटें इस सदी के अंत तक हमारी धरती से टकराएंगी। जापानी शोधकर्ता कोसूके नामेकाटा ने कहा कि धरती से टकराने वाली लपटें भी उसी तरह से शक्तिशाली हो सकती हैं। बता दें कि धरती की मैग्नेटिक फील्ड हमें इन सौर तूफानों के कारण होने वाले किसी संभावित नुकसान से बचाती हैं। अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA के मुताबिक बड़े CME में अरबों टन मैटर लाखों मील प्रतिघंटे की रफ्तार से ट्रैवल करता है। सूरज में होने वाले विस्फोट से निकल रहे इन पार्टिकल्स आमतौर पर जब धरती के वायुमंडल से टकराते हैं तो Aurora के रूप में इनका असर दिखाई देता है।

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