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बिहान से जुड़कर आदिवासी महिलाएं अपनी पारंपरिक धरोहर संवार रहीं – बांस शिल्प की कारीगरी में निपुण आदिवासी महिला समूह बन रहा है आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर

जांजगीर-चांपा. आदिवासी महिलाएं अपनी बांस शिल्प की पारंपरिक कारीगरी को सहेजने और उसे आगे ले जाने, उससे अपने आत्मबल को बढ़ाने का काम कर रही है। उनकी इस कारीगरी को और धारदार बनाने के लिए गांव के तीन स्व सहायता समूह की महिलाओं को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जोड़ा गया है। उन्हें बिहान से बांस शिल्प के क्षेत्र में बेहतर प्रशिक्षण दिया गया है, साथ ही बैंक लिंकेज कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। योजना से जुड़ने के बाद वे अपनी आजीविका के साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
जिले के सक्ती विकाखण्ड में प्राकृतिक सौंदर्य, सम्पदाओं एवं आदिवासी बहुल क्षेत्र के रमणीय स्थल ग्राम पंचायत ऋषभतीर्थ है। इस गांव की महिलाएं पारंपरिक तौर से बांस से टोकनी, झाडू, सूपा एवं वैवाहिक सामाग्री को बनाकर उन्हें साप्ताहिक बाजारों में बेचकर अपनी आजीविका चलाती थी, लेकिन इससे उनकी उतनी आमदनी नहीं होती थी, बमुश्किल ही गुजारा हो रहा था। ऐसे में उनकी इस व्यथा को समझा बिहान ने और उनका हाथ थामा। उस गांव के 30 परिवारों की 15 सदस्यों का चयन बांस शिल्प के प्रशिक्षण के लिए किया। चयनित प्रगति महिला स्व सहायता समूह की सदस्य विमलातुरी, अहिल्या, नीरा, उजाला स्व सहायता समूह की संतोषी, गणेशी, नैहरी, विशेश्वरी स्व सहायता समूह की सदस्य गायत्री, वैशाखी आदि को गांव में बांस शिल्प के क्षेत्र में प्रशिक्षित ट्रेनर के माध्यम से 20 दिन का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण मिलने के बाद अब महिलाएं ट्री गार्ड, बांस शिल्प से निर्मित उत्पाद जिसमें घड़ी, गुलदान, वाल हैंगिंग, डस्टबिन, पेन स्टैंड, दीवाल स्टैंड आदि कलात्मक कलाकृतियां बनाने लगी हैं। जिन्हें वे आसपास के बाजारों में बेचकर पहले से अधिक आमदनी प्राप्त कर रही हैं। उनके इस काम को देखकर योजना के माध्यम से बैंक लिंकेज कराकर लोन दिए जाने की दिशा में प्रस्ताव तैयार किया गया है।


महिलाओं का सशक्त बनाना उद्देश्य
जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी तीर्थराज अग्रवाल का कहना है कि स्व सहायता समूह की महिलाओं को सशक्त, समृद्ध एवं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। उन्हें योजना के माध्यम से हर संभव प्रशिक्षण दिया जा रहा है और आगे भी उन्हें दिया जाएगा। सहायक परियोजना अधिकारी एसके ओझा ने भी विगत दिवस गांव में जाकर समूह की महिलाओं द्वारा बनाए जा रहे बांस शिल्प के काम को देखा। इस दौरान महिलाओं ने बताया कि वे जांजगीर में आयोजित जाज्वल्य लोक महोत्सव में भी अपने समूह के बनाए गए उत्पादकों का स्टाल लगाएंगी।

[su_heading]इन्हें भी देखें…[/su_heading]
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