महिला एवं बाल विकास विभाग ने वेबिनार से समझाया कुपोषण का प्रबंधन, गंभीर और मध्यम कुपोषित बच्चों की पहचान और देखभाल के तरीके सिखाए गए

रायपुर. महिला एवं बाल विकास द्वारा पोषण अभियान अंतर्गत चल रहे पोषण माह के दौरान डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में आज गंभीर और मध्यम कुपोषित बच्चों की पहचान और समुदाय द्वारा उनके प्रबंधन के बारे में फेसबुक लाइव और डिजिटल मीट के माध्यम से ऑनलाइन ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया गया। इसमें विभागीय सचिव प्रसन्ना आर.,यूनिसेफ के राज्य प्रमुख जॉब जकारिया सहित तकनीकी विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किये। वेबमीट में सभी जिलों के विभागीय मैदानी अमले ने भाग लिया।
महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव प्रसन्ना आर. ने कोविड काल में सक्रिय काम के लिए मैदानी अमले को बधाई और धन्यवाद देते हुए कहा कि हम सबको मिलकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा अनुरूप छत्तीसगढ़ से कुपोषण को दूर करना है। छत्तीसगढ़ में 27 प्रतिशत बच्चे हैं, जिन्हें सिर्फ खाना खिला कर ठीक नहीं किया जा सकता। उनके स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को पहचान कर स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराना जरूरी है। इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग स्वास्थ विभाग के साथ समन्वय बनाकर काम करें।
उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं समुदाय से सीधे जुड़ी रहती हैं इसलिए वे समुदाय में व्यवहार परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। पालकों और गांवों में चर्चा के दौरान समझाएं कि बच्चों की स्वास्थ्यगत परेशानी दूर करने के लिए स्वास्थ्य केन्द्रों में भेजना चाहिए। इसके लिए स्वास्थ्यगत परेशानी से ग्रसित बच्चों का चिन्हांकन भी आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है इसलिए कोरोना प्रोटोकाल का पालन करते हुए कुपोषण से लड़ाई जारी रखें।
जॉब जकारिया ने कहा कि भारत में 68 प्रतिशत बच्चों की मौत का कारण कुपोषण है। देखा गया है कि आपदा के बाद कुपोषण बढ़ जाता है। इसी तरह कोविड आपदा के बाद बच्चों का कुपोषण 14 प्रतिशत बढ़ने की आशंका है। देश में कोविड केस बढ़ रहे हैं। इसी समय हमें कुपोषण को रोकने के लिए समुदाय को सशक्त करना है।
कोविड और कुपोषण से लड़ाई हमें साथ-साथ लड़नी है। इसके साथ उन्होंने 6 महीने लगातार मां का दूध और उसके बाद उपरी आहार देने और बच्चों के टीकाकरण और आस पास साफ-सफाई के बारे में समझाया।
वेबिनार में यूनिसेफ की न्यूट्रिशन एक्सपर्ट फरहद सैयद ने कुपोषित बच्चों की स्क्रीनिंग,पहचान, फॉलोअप के संबंध में विस्तार से बताया। दिल्ली की टेक्निकल एक्सपर्ट डॉ. अमर निधि ने कुपोषण दूर करने में समुदाय की भागीदारी और यूनिसेफ क अभिषेक सिंह ने अति गंभीर और मध्यम कुपोषित बच्चों की पहचान और ग्रेडिंग के संबंध में समझाया। इसके साथ ही कुपोषण के संबंध में एक्सपर्ट ने जिज्ञासाओं और प्रश्नों के उत्तर भी दिए।

 



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