उस Coolie की कहानी, जिसने IAS बनकर बताया कि सपने सच होते हैं!

सारी दुनिया का बोझ हम उठाते हैं… लोग आते हैं, लोग जाते हैं, हम यहीं पे खड़े रह जाते हैं…। अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्म ‘कुली’ (1983) का यह गीत आज भी बहुत से कुली भाइयों की व्यथा को समझाता है! हालांकि, एक कुली ऐसा है जिसकी कहानी नौजवानों की जिंदगी में आशा की किरण बिखेरती है। क्योंकि भैया हो कहीं भी लेकिन आग जलनी चाहिए…, केरल के मुन्नार के रहने श्रीनाथ कहानी भी हमें यही समझाती है। एक समय था जब वो रेलवे स्टेशन पर कुली बन यात्रियों का बोझ उठाते थे लेकिन आज वह एक आईएएस अधिकारी हैं।

 



दूसरों के लिए बने एक मिसाल

यूपीएससी की परीक्षा पास करना आसान काम नहीं। प्रत्येक वर्ष लाखों एस्पिरेंट्स इस एग्जाम में बैठते हैं। लेकिन उनमें से कुछ ही सिविल सेवा परीक्षा को पास कर आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारी बन पाते हैं। श्रीनाथ के. उन एस्पिरेंट्स में से हैं जिन्होंने इस परीक्षा को पास करने के लिए जी जान लगा दी और आईएएस बन उन लाखों छात्रों को बताया कि अगर आप चाहें तो हर परिस्थिति में रास्ता खोजकर सफलता की तरफ बढ़ सकते हैं।

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क्या है श्रीनाथ की कहानी?

श्रीनाथ के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। इसलिए उन्होंने एर्नाकुलम स्टेशन पर कुली का काम शुरू किया। हालांकि, साल 2018 में उन्होंने यह फैसला किया कि वो खूब मेहनत कर एक अच्छी नौकरी हासिल करेंगे जिससे ना सिर्फ उनकी आय बढ़े, बल्कि वह अपनी बेटी का भविष्य संवार सकें। शुरुआत में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा देने का मन बनाया। लेकिन आर्थिक स्थिति उनकी राह का रोड़ा बन कर खड़ी थी। दरअसल, वो कोचिंग सेंटर की फीस नहीं दे सकते थे।

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चौथे प्रयास में बने आईएएस

ऐसे में उन्होंने KPSC (केरल लोक सेवा आयोग) की परीक्षा की तैयारी कर दी, जिसमें रेलवे स्टेशन पर लगे फ्री वाईफाई ने उनकी काफी मदद की। दरअसल, स्टेशन के WiFi से श्रीनाथ ने स्मार्टफोन पढ़ाई करने लगे। खाली समय में वो ऑनलाइन लेक्चर डाउनलोड करते और काम के दौरान भी उन्हें कान में हेडफोन लगाकर सुनते। अपने इसी जुनून के दम पर वह KPSC की परीक्षा में कामयाब हो गए। लेकिन श्रीनाथ का लक्ष्य उससे भी बड़ा था। इसलिए उन्होंने कुछ समय बाद आईएएस की तैयारी की और चौथे प्रयास में यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल की।

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