इसलिए लोग पीते हैं शराब!.. बंदरों पर हुए शोध में सामने आई सच्चाई. पढ़िए

मुझे पीने का शौक नहीं, पीता हूं गम भुलाने को… 80 के दशक का यह मशहूर गाना तो आपने कई शराब के शौकीनों से सुना होगा पर क्या आपको यह पता है कि बंदर भी नशे के आदी होते हैं। फिर उन्हें कौन सा गम है? दरअसल, बंदर गम भुलाने के लिए नहीं बल्कि थकान मिटाने, नींद पूरी करने, एनर्जी और पाचन के लिए ऐसे फलों को खाते हैं, जिसमें इथेनॉल नाम का अल्कोहल होता है। बाकायदा रिसर्चर्स ने बंदरों की पेशाब के सैंपल की जांच करने के बाद इस बात को पुख्ता किया कि बंदरों के पेशाब में इथेनॉल मिले हैं।

 



पाम फ्रूट में इथेनॉल से चढ़ता है बंदरों को सुरूर
अलग-अलग रिसर्च पर मीडिया र्रिपोर्ट्स के मुताबिक पनामा में ब्लैक हैंडेड स्पाइडर मंकी नाम की बंदरों की एक प्रजाति को पाम फ्रूट बहुत पसंद है। वे इसके इतने दीवाने हैं कि इसे खाकर नशा चढ़ जाता है। पाम फ्रूट में इथेनॉल नाम का अल्कोहल होता है, जिसके कारण इसे खाने के बाद बंदरों को नींद आती है। रिसर्चर्स ने दो स्पाइडर मंकीज की पेशाब के सैंपल लिए। इनकी जांच करने पर पेशाब में इथेनॉल के पुख्ता सबूत मिले। रिसर्च में शामिल नॉर्थरिज कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक क्रिस्टीना कैंपबेल कहती हैं कि जंगलों में रहने वाले बंदर नशे में धुत्त रहते हैं। यह बात सबसे पहले साल 2000 में बायोलॉजिस्ट रॉबर्ट डडले ने की थी। डडले का कहना था कि बंदर अल्कोहल के स्वाद और गंध से अट्रैक्ट होते हैं। वे नशीले फलों को पहचानकर उन्हें झट से खा जाते हैं, ताकि कोई और जानवर उन्हें न खा पाए।
क्या इंसानों की सोच भी बंदरों की तरह ही

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रिपोर्ट के मुताबिक इंसानों की सोच भी बंदरों वाली हो सकती है। शायद एनर्जी बढ़ाने और थकान मिटाने के लिए इंसान भी अल्कोहल का सेवन करना पसंद करते हैं। मध्य और दक्षिणी अमेरिका में लोकल लोग इसी पाम फ्रूट का इस्तेमाल करते हैं। इससे चीचा नाम की देशी शराब बनाई जाती है। जितना ज्यादा फर्मेंटेड फल खाएंगे, शरीर को उतनी ही ज्यादा ताकत मिलेगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि इवोल्यूशन के गुण करोड़ों सालों में बंदरों से इंसानों में ट्रांसफर हुए हैं। इसका मतलब कि चाहे बंदर हो या इंसान, शराब सबको पसंद है। इंसान, चिम्पैंजी, बोनोबोस और गोरिल्ला के जीन्स काफी हद तक समान हैं। इनमें एक जीन ऐसा है जो इथेनॉल एंजाइम को 40 गुना सुधार देता है।

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