पत्तियां खाने वाले ऊंट के मुंह में किंग कोबरा क्यों डाला जाता है? हैरान कर देगी इसके पीछे की रोचक कहानी. पढ़िए..

आपने राजस्थान के मरुस्थल, दिल्ली की परेड, या अपने गांव-मोहल्ले में ऊंट तो जरूर देखा होगा। इनकी सवारी का अपना अलग ही आनंद है। बैठने पर थोड़ा शाही फील आता है। ये पत्ते, पौधे, फल-फूल आदि खाते हैं। इनके शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कूबड़ होता है, हां वही जो ऊपर की ओर उठा होता है। ऊंट यहीं पर चर्बी स्टोर करके रखते हैं और जब तेज गर्मी में भोजन-पानी मिलने की उम्मीद नहीं रह जाती तो इसी फैट के सहारे वे जिंदा रहते हैं। ये बात सच है कि बिना पानी पिए ऊंट लंबे समय तक रह सकता है, लेकिन जब पीता है तो 100-150 लीटर गटक जाता है। लचक कर चलने वाले इस शानदार जानवर की ऊंचाई 7 फीट तक हो सकती है। ऐसे में वो क्या वजह है कि ऊंट को सांप खिलाने की नौबत आती है?



 

 

 

 

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मुंह खोलकर डाल देते हैं सांप

दरअसल, ऊंट को एक अजीब बीमारी होती है। वे खाना-पीना छोड़ देते हैं। शरीर अकड़ने लगता है। ऐसी मान्यता है कि ऊंट का इलाज करने के लिए उसे जहरीला सांप खिलाना जरूरी होता है। इसके बाद ऊंट के मालिक उसके मुंह को खोलते हैं और जहरीला सांप डाल दिया जाता है। इसके ठीक बाद पानी डाल दिया जाता है जिससे वह सांप अंदर चला जाए।

 

 

 

किंग कोबरा, पाइथन खिलाना होगा

इसके पीछे धार्मिक मान्यता है। इस बीमारी को Hyam कहते हैं। इसका मतलब ‘जिंदा सांप निगलना’ बताया जाता है। लोगों का यह भी कहना है कि वैज्ञानिक इस रहस्यमय बीमारी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं जुटा पाए हैं, जिससे ऊंट का इलाज किया जा सके। ऐसे में ऊंट मालिक को किंग कोबरा जैसे जहरीले सांप या पाइथन खिलाने ही होंगे।

 

 

 

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आगे क्या होता है…

माना जाता है कि इससे सांप का जहर ऊंट के शरीर में फैल जाता है। जब असर कम होने लगता है तो ऊंट भी ठीक होने लगता है। कुछ दिन में ऊंट पूरी तरह से चंगा हो जाता है। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

 

 

 

डॉक्टर कहते हैं अलग बात

जानवरों के एक्सपर्ट डॉक्टरों की मानें तो यह कीड़े के काटने से यह बीमारी होती है। ऊंटों में गर्भपात के साथ मौत भी हो सकती है। इसके लक्षण बुखार, आंखों से आंसू गिरना, एनीमिया, शरीर का फूलना, ऊर्जा की कमी आदि है। इलाज न होने पर Trypanosomiasis से ऊंट के मरने का खतरा रहता है। डॉक्टर सांप खिलाने से ऊंट के ठीक होने की बात को एक मिथक मानते हैं।

 

 

धीर-गंभीर होता है रेगिस्तान का जहाज
इस बीमारी के साथ ही यह भी जान लीजिए कि ऊंट को शांत प्रजाति का जानवर माना जाता है। इसे धैर्य, सहनशीलता और धीरज का प्रतीक कहा जाता है। ये 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकते हैं।

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