मरे जानवरों की सींग से तैयार होते हैं नॉन-वेज बर्तन, करोड़ों का है बिजनेस. पढ़िए..

भगवान ने दुनिया में ऐसी कई चीजें बनाई है, जिसे देखकर आश्चर्य होता है. कुछ भी ऐसा नहीं है, जो इस्तेमाल के लायक और जरूरत में आने लायक नहीं है. दुनिया का हर जीव किसी ना किसी तरह से प्रकृति के काम आता है.

 



 

 

 

इसके अलावा जब वो मर जाते हैं, तब इंसान उससे अपने फायदे की चीजें भी बना लेता है. ऐसे कई जानवर हैं, जिसकी स्किन से चमड़े, फर से स्वेटर बनाए जाते हैं. इन जरूरतों के कारण इन जानवरों का इलीगल शिकार भी होता है. आज हम आपको जानवरों के सींग के करोबार के बारे में बताने जा रहे हैं.
ऐसे कई जानवर हैं, जिनकी मौत के बाद लोग उनके बॉडी पार्ट्स का इस्तेमाल करते हैं. कई जानवरों की खाल से जूते-चप्पल बनाए जाते हैं. जितना रेयर जानवर होता है, उसके प्रोडक्ट उतने महंगे होते हैं. सोशल मीडिया पर इन जानवरों की सींग से बने बर्तनों का एक वीडियो शेयर किया गया. इसमें ठेले से आए सींग को कैसे कारीगरों ने खूबसूरत शेप दिया, ये दिखाया गया. अपने हाथ से इन सींगों को कारीगर सुन्दर बर्तनों में बदल देते हैं.

इसे भी पढ़े -  Akaltara News : बनाहिल में स्थित श्री ऋषभ विद्योदय महाविद्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया, छात्र-छात्राओं ने धरती को सौंपा हरियाली का तोहफा, हर पौधे संग ली ‘सांसों की रक्षा’ की शपथ

 

 

 

करोड़ों का कारोबार
सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के एक लोकल फैक्ट्री का वीडियो शेयर किया गया. इसमें कई कारीगरों ने एक छोटे से फैक्ट्री नुमा स्पेस में ही सींगों से सुंदर-सुंदर बर्तन तैयार कर लिए. वीडियो में दिखाया गया कि कैसे विदेशों से जानवरों के सींग भारत मंगवाए जाते हैं. खासकर अफ्रीका जैसे देशों से. ऐसा इसलिए कि वहां जानवर ज्यादा हैं. उनके मरने के सींगों को अलग कर लिया जाता है और फिर उन्हें बेचा जाता है. इसका बिजनेस करोड़ों-अरबों का है.

इसे भी पढ़े -  Akaltara News : अकलतरा SDM और तहसीलदार ने विश्व पर्यावरण के दिवस पर किया पौधरोपण, लोगों को अधिक से अधिक पेड़ लगाने की अपील

 

 

 

 

 

बेहद मेहनत का है काम
एक बार ये सींग फैक्ट्री तक आ जाते हैं, उसके बाद कारीगर इन्हें अच्छे से साफ़ करते हैं. सींग की डिजायन के आधार पर ये तय किया जाता है कि किस सींग से कौन सा बर्तन तैयार किया जाएगा. इसके बाद कारीगर इन्हें बर्तनों का शेप देना शुरू करते हैं. कभी काटकर, कभी मोड़कर, कभी आग में जला कर इन सींगों को बर्तनों का आकार दिया जाता है. दिखने में ये बर्तन इतने खूबसूरत होते हैं कि यकीन ही नहीं होता कि इनके निर्माण में जानवरों की सींग का इस्तेमाल किया गया है. आप भी देखिये ये पूरा प्रोसेस.

इसे भी पढ़े -  Akaltara News : अकलतरा SDM और तहसीलदार ने विश्व पर्यावरण के दिवस पर किया पौधरोपण, लोगों को अधिक से अधिक पेड़ लगाने की अपील
error: Content is protected !!