1400 साल से टिकी है दुनिया की सबसे पुरानी कंपनी! 2 विश्‍व युद्ध झेला, 2 परमाणु बम गिरा पर कुछ नहीं हुआ!

नई दिल्‍ली. अगर आपसे पूछा जाए कि दुनिया की सबसे पुरानी कंपनी कौन सी है और क्‍या काम करती है. तो, दावा है कि 100 में 100 लोगों को शायद ही इसका जवाब पता होगा. कुछ का अंदाजा परदादा के जमाने से ऊपर जाएगा ही नहीं, लेकिन असल बात ये है कि यह कंपनी परदादा के परदादा से भी कहीं ज्‍यादा पुरानी है. सबसे खास बात ये है कि आज भी यह कंपनी बदस्‍तूर अपना काम जारी रखे हुए है.

 



 

 

 

दरअसल, हम बात कर रहे हैं जापान की रियल एस्‍टेट कंपनी कांगो गूमी (Kongo Gumi) की. बिल्डिंग बनाने वाली यह फर्म करीब 1400 साल से अपना काम बदस्‍तूर जारी रखे हुए है. इस कंपनी की स्‍थापना कोरिया के बिल्‍डर शीगमिशु कांगो ने साल 578 ईसवी में की थी. इस तरह करीब 1445 साल से यह कंपनी लगातार काम कर रही है. अभी तक इस कंपनी ने तमाम शासक देखे, अंग्रेजों की गुलामी झेली, 2 विश्‍व युद्ध देखे और 2 परमाणु बम के हमले भी झेल लिए पर मजाल है जो इसकी साख पर आज तक असर हुआ हो.

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क्‍या काम करती है यह कंपनी
कांगो गूमी का मुख्‍य काम मंदिरों का निर्माण करना है. दरअसल, कोरियाई बिल्‍डर कांगो को जापान के प्रिंस शोकोतु ने बुद्ध मंदिर का निर्माण करने के लिए बुलाया था. इस कंपनी का मुख्‍यालय जापान के ओसाका शहर में है, जहां पत्‍थर की 3 मीटर की एक स्‍मृति पट्टिका बनाई गई है, जिस पर कंपनी संभालने वाली 40 पीढि़यों का नाम लिखा हुआ है.

 

 

 

 

अब तक क्‍या-क्‍या बनाया
अगर आप कांगो गूमी के काम को देखना चाहते हैं तो जापान की सैर कीजिए. इस कंपनी ने 1400 साल से तमाम ऐसी इमारतों और मंदिरों का निर्माण किया है, जो आज भी किसी अजूबे से कम नहीं दिखती. चाहे 16वीं शताब्‍दी में बनाया गया ओसाका कैसल देखें या 593 ईसवी में बना जापान का पहला बुद्ध मंदिर, संस्‍कृति के साथ कला की विरासत भी दिखती है. यही कारण है कि इन भवनों को यूनेस्‍को ने अपनी विश्‍व विरासत की सूची में डाल दिया है.

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अब तक बहुत कुछ झेला
कांगो गूमी कंपनी ने अपनी स्‍थापना के बाद से बहुत कुछ झेला है. चाहे 794-1185 के हेईयान काल का सत्‍ता संघर्ष हो या 1185-1333 तक कामाकुरा काल का इंडस्ट्रियल विस्‍तार अथवा 2 विश्‍व युद्ध और 2 परमाणु हमला, इस कंपनी की विरासत आज भी अपने काम की वजह से बनी हुई है. सबसे बड़ी खासियत ये है कि निर्माण में लकड़ी का खास तरह से इस्‍तेमाल करने की महारत सिर्फ इसी कंपनी के पास थी.

 

 

 

 

अब किसके पास है कमान
साल 2006 में कंपनी पर भयंकर आर्थिक बोझ पड़ा और आखिरकार यह बिकने के लिए मजबूर हो गई. फिलहाल इसकी कमान तकामशु कंस्‍ट्रक्‍शन ग्रुप के पास है, लेकिन इसकी शर्त यही रखी गई है कि इस कंपनी की परंपरागत निर्माण कला को बरकरार रखा जाएगा. आज यह कंपनी कांगो गूमी के नाम से ही श्राइन और मंदिरों का निर्माण करती है. जब इस कंपनी को बेचा गया था तो इसमें 100 कर्मचारी काम कर रहे थे, जबकि साल 2005 में इसका सालाना राजस्‍व करीब 570 करोड़ रुपये था.

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