कक्षा सातवीं की छात्रा से दुष्कर्म का मामला, तात्कालिक थाना प्रभारी निरीक्षक गोपाल सतपथी की कार्रवाई में आरोपी को आजीवन कारावास, 72 घंटे में किया गया था चालान, निरीक्षक को आईजी ने किया था सम्मानित. पढ़िए..

जांजगीर : कक्षा 7 वी में पढ़ने वाली नाबालिग का अपहरण कर दुष्कर्म करने व जान से मारने की धमकी देने वाले आरोपी को न्यायालय द्वारा भादवि की धारा 363 के अपराध के लिए 3 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1000/- के अर्थदण्ड, धारा 506 के अपराध के लिए 1 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1000/- अर्थदण्ड तथा पाक्सो एक्ट की धारा 4 नाबालिग से दुष्कर्म के अपराध के लिए आजीवन कारावास जिसका अर्थ शेष प्राकृति जीवन काल है तक की सजा एवं 20,000/- के अर्थदण्ड से दंडित किया गया है।

 



 

 

 

विशेष लोक अभियोजक, चंद्रप्रताप सिंह के अनुसार छात्रा दिनांक 21.01.2023 को शाम करीब 5 बजे अपने घर से निकलकर अपनी मामी के घर जा रही थी. तभी रास्ते में पोस्ट आफिस के पास ठड़गाबहरा का किशन बंजारे उसे चल मैं तुझे तेरी मामी के घर छोड़ दूंगा कहकर उसके हाथ को जबरदस्ती पकड़कर अपने मोटर सायकल में पीछे बैठा लिया और उसे उसके मामी के घर न लेजाकर हरदी बाजार रोड में ले गया। इसके बाद पेट्रोल पम्प के सामने खेत में उसके कपड़े को जबरदस्ती खोलकर दुष्कर्म किया. साथ ही, घटना के बारे में किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दिया और पीडिता को मोटर सायकल से बलौदा में चल रहे मेला में छोड़ दिया। पीडित्ता रोते रोते अपने घर आयी और घर आने के बाद घटना के बारे में अपनी मां, पड़ोस की नानी तथा अपने पिता को बतायी। उक्त घटना के संबंध में पीडिता द्वारा बलौदा में रिपोर्ट दर्ज कराये जाने पर पीडिता की रिपोर्ट पर तात्कालिक थाना प्रभारी गोपाल सतपथी ने आरोपी के विरूद्ध धारा 376,506,363 भादसं एवं धारा 4 पाक्सो एक्ट का अपराध पंजीबद्ध कर प्रकरण विवेचना में लिया। तथा आरोपी को तत्काल पकड़कर न्यायिक रिमांड में भेजकर 72 घंटो के भीतर चालान न्यायालय पेश किया गया. जिसके लिए तात्कालिक आई बिलासपुर रेंज अभिषेक मीणा ने निरीक्षक गोपाल सतपथी को उनके कार्य के लिए सम्मानित भी किया।

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-शैलेन्द्र चौहान सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट जांजगीर न्यायालय में अभियोजन की ओर से तर्क किया गया कि जिस प्रकार से नाबालिग को मामी के घर छोड़ दूंगा कहकर कहीं दूसरे जगह जबरदस्ती ले जाकर दुष्कर्म किया गया है वह अत्यंत ही निंदनीय घटना है। अर्थात बच्चों का शारीरिक शोषण एक गंभीर सामाजिक अपराध है जिस पर उदारतापूर्वक विचार किया जाना कतई संभव नहीं है। वह निश्चित ही गंभीर अपराध का दोषी है। अतः अभियुक्त को कठोर से कठोर दण्ड से दंडित किया जावे।
अतः प्रकरण की परिस्थिति, अपराध की गंभीरता एवं सामाजिक प्रभाव को देखते हुए अभियुक्त किशन बंजारे पिता दशरथ प्रसाद बंजारे उम्र 33 वर्ष निवासी वार्ड नं. 2 ठड़‌गाबहरा बलौदा थाना बलौदा जिला जांजगीर-चांपा, छ०म० को भादवि की धारा 363 के अपराध के लिए 3 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1000/- के अर्थदण्ड, धारा 506 के अपराध के लिए 1 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1000/- अर्थदण्ड तथा पाक्सो एक्ट की धारा 4 नाबालिग से दुष्कर्म के अपराध के लिए आजीवन कारावास जिसका अर्थ शेष प्राकृति जीवन काल है एवं 20,000/- के अर्थदण्ड से दंडित किया गया है। अर्थदण्ड की राशि अदा नहीं करने पर कमशः 1 माह, 1 माह, एवं 2 माह का साधारण कारावास से दंडित किया गया है।

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