पूर्व आईएएस विकास दिव्‍यकीर्ति ने कहा, ‘पेरेंट्स बच्‍चे को न बनाएं ज्‍यादा काबिल’, अपनी खुशी के लिए करें ये काम

हम सभी इस बात को बखूबी समझते हैं कि बच्‍चों की परवरिश करना मां-बाप के लिए आसान नहीं होता है बल्कि इसके दौरान पेरेंट्स के सामने कई तरह की चुनौतियां और अड़चनें आती हैं। कभी उन्‍हें बच्‍चों के टैंट्रम के साथ डील करना पड़ता है, तो कभी उन पर बच्‍चों को अच्‍छी आदतें सिखाने की जिम्‍मेदारी भी होती है।

 



 

 

 

 

बच्‍चों की परवरिश को लेकर दृष्टि कोचिंग सेंटर के संस्‍थापक विकास दिव्‍यकीर्ति ने बताया है कि पेरेंट्स को अपने बच्‍चों से ज्‍यादा उम्‍मीदें नहीं रखनी चाहिए बल्कि बच्‍चों के साथ सहज रहना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि आप बच्‍चों पर ज्‍यादा बोझ न डालें। आपका बच्‍चा अपनी जिंदगी में कुछ ठीक ठाक कर लेगा।

 

 

विकास दिव्‍यकीर्ति ने कहा कि जो बच्‍चे ज्‍यादा काबिल या योग्‍य होते हैं, वो अपने मां-बाप के बुढ़ापे में काम नहीं आते हैं या उनसे दूर रहते हैं। ये बच्‍चे अपने पेरेंट्स के लिए सिर्फ मनी ऑर्डर भेजते हैं। इसलिए उनका मानना है कि पेरेंट्स अपने बच्‍चों को ज्‍यादा काबिल बनने के लिए दबाव न डालें।

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योग्‍यता नहीं खुशी है जरूरी

उनका कहना है कि जो कम योग्‍य बच्‍चे हैं, वो अपने पेरेंट्स के साथ जिंदगीभ रहेंगे जिससे उनका परिवार एकसाथ रह पाएगा और मां-बाप भी खुश रहेंगे। इस तरह आप अपने कम योग्‍य बच्‍चे के साथ भी खुश रह सकते हैं। आप अपने बच्‍चे पर अपनी अत्‍यधिक इच्‍छाएं मत थोपिए। आपका बच्‍चा खुश रहेगा, तो आप भी खुश रहेंगे।

 

 

 

 

विकास का कहना है कि आपको अपने बच्‍चे के साथ रहने पर हर स्थित में खुशी मिलेगी। आप उस पर अपनी योग्‍यता से ज्‍यादा करने का बोझ मत डालिये। वो कम योग्‍य होने पर आपके साथ रहेगा, तो आपको ज्‍यादा खुशी होगी और आप दोनों एक-दूसरे का मुश्किल वक्‍त में साथ दे पाएंगे। आप दूसरे पेरेंट्स को देखकर अपना पेरेंटिंग स्‍टाइल न बदलें।

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बच्‍चों की मेंटल हेल्‍थ पर पड़ता है असर

टेडएक्‍स टॉक में एजुकेटर ऑस्‍टेजा लैंड्बर्गिनी ने कहा है कि न्‍यूरोसाइंटिस्‍टो ने पाया है कि लंबे समय से स्‍ट्रेस में रहने से ब्रेन की संरचना और कार्यशैली में बदलाव आ सकता है। जब मां-बाप अपने बच्‍चे से ज्‍यादा उम्‍मीदें रखते हैं, तो इससे बच्‍चा तनाव में रहना शुरू कर देता है। जो बच्‍चे बहुत स्‍ट्रेस में रहते हैं, उन्‍हें आगे चलकर एंग्‍जायटी, डिप्रेशन और मूड स्विंग्‍स जैसे विकार हो सकते हैं।

 

 

 

 

 

इसका मतलब है कि पेरेंट्स की ज्‍यादा उम्‍मीदों को पूरा करते-करते बच्‍चे तनाव में आ जाते हैं और इसकी वजह से वो वयस्‍क होने तक किसी न किसी मानसिक बीमारी का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में बच्‍चों से मां-बाप का ज्‍यादा उम्‍मीदें रखना, सही नहीं है। एक पेरेंट के तौर पर आपको भी इस बात का ख्‍याल रखना चाहिए।

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