भूकंप-तूफान से तय ‘मौत’ का रास्ता बदला; 25000 मील की रफ्तार से आ रहा था Asteroid, नासा का ताजा अपडेट..

arth Asteroid Collision Latest Update: शुक्र है भगवान का कि आफत टल गई। धरती पर बीती रात भूकंप और तूफान आने का खतरा मंडरा रहा था, लेकिन वह ‘काली’ रात गुजर गई। अमेरिका की स्पेस एजेंसी ने उस एस्ट्रॉयड को लेकर ताजा अपडेट दिया है, जो 15 सितंबर की रात को धरती से टकराने वाला था।

 



 

 

 

25000 मील यानी करीब एक लाख किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ON 2024 नामक एस्ट्रॉयड धरती से करीब 620000 मील दूर से गुजरा, लेकिन यह धरती से टकराया नहीं। ऐसे हालत नहीं बने कि इसकी दिशा बदल जाती। यह एस्ट्रॉयड 720 फुट बड़ा था, जो 2 क्रिकेट पिच जितना साइज है। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के अनुसार, फिलहाल धरती सुरक्षित है, लेकिन इतना ही विशाल एस्ट्रॉयड अब साल 2036 में धरती की तरफ आएगा।

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अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने ट्रैक की स्पीड और साइड

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 15 सितंबर की रात को जब एस्ट्रॉयड धरती की तरफ आया तो नासा के नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट ऑब्जर्वेशन प्रोग्राम के वैज्ञानिकों ने इसकी स्पीड और साइड ट्रैक की। कैलिफोर्निया की जेट प्रपल्शन लैब (JPL) के रडार और ऑप्टिकल दूरबीनों के जरिए वैज्ञानिकों ने इस पर बारीकी से नजर बनाए रखी, लेकिन अंतरिक्ष में ऐसा कोई तूफान नहीं आया, जो इसकी साइड को बदल देता और रात गुजर गई। एस्ट्रॉयड भी सुरक्षित धरती के पास से गुजर गया। वैसे वैज्ञानिकों ने पहले ही कह दिया था कि इसकी बहुत तेज स्पीड और धरती से दूरी के कारण टकराव की संभावना नहीं है, लेकिन सोलर स्टॉर्म आया तो इसकी दिशा बदल सकती है। ऐसा हुआ नहीं और खतरा टल गया। हां, क्योंकि यह धरती के काफी करीब से गुजरा भी है तो इसकी तरंगों का असर पड़ा है।

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अपोफिस टकराएगा और 2 चांद दिखेंगे

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एस्ट्रॉयड के धरती से टकराने का खतरा बना रहा है और आगे भी बना रहेगा। जी हां, एक और एस्ट्रॉयड धरती की तरफ बढ़ रहा है, लेकिन यह एस्ट्रॉयड टकराएगा नहीं, बल्कि धरती की ग्रैविटी में आकर चांद बन जाएगा। फिर यह 2 महीने तक धरती की परिक्रमा करता रहेगा। इस दौरान लोगों को 50 से ज्यादा दिन रोज रात को 2 चांद नजर आएंगे। वहीं साल 2029 में अप्रैल के महीने में अपोफिस नामक एस्ट्रॉयड धरती की तरफ आएगा और धरती से इसके निश्चित ही टकराने का अलर्ट वैज्ञानिकों ने दिया है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) समेत कई इंटरनेशनल स्पेस एजेंसी इस एस्ट्रॉयड पर अपनी नजर बनाए हुए हैं, ताकि खतरा महसूस होते ही अलार्म बजाकर लोगों को अलर्ट किया जा सके।

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