Baheradih Good News : बहेराडीह के गोठान में संग्रहित किया गया पैरा, पराली को खेतों में जलाने की बजाय सहेजने की है परंपरा, पैरा को मशीन से काटकर भूसी बनाकर लाखों का होता है कारोबार

जांजगीर-चाम्पा. जिले में बहेराडीह एक ऐसा गांव है, जहां पर खेतों में पराली को कभी जलाया नहीं जाता, बल्कि इसे सहेजकर मवेशी को खिलाने में चारा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यहाँ के ग्रामीणों के लिए पराली अनमोल चीज़ है, वहीं गाँव के आसपास खेतों में बेकार पड़े पैरा अर्थात पराली को बड़े पैमाने पर एकत्रित करके मशीन से काटकर भूसी बनाकर आसपास की डेयरी में सप्लाई करके लाखों का कारोबार इस गाँव के किसान करते हैं।

 



इस सम्बन्ध में बहेराडीह गांव की सरपंच श्रीमती चन्द्रकला सरवन कश्यप ने बताया कि जिले में बहेराडीह एक ऐसा गाँव है, जहाँ कभी भी किसान अपने खेतों में पराली अर्थात पैरा को नहीं जलाते, बल्कि उसका इस्तेमाल अपने मवेशियों को चारा के रूप में खिलाने में किया जाता है और यहाँ के गोठान और पंचायत मुख्यालय जाटा में स्थित गोठान में मवेशियों को खिलाने के लिए पैरा एकत्रित कराया गया है। बिहान की पशु सखी पुष्पा यादव व क़ृषि सखी शशि कर्ष ने बताया कि बहेराडीह, यादव बाहुल्य गाँव है। जिसका पुश्तैनी कारोबार है पशुपालन और दुग्ध उत्पादन। ऐसे में यहाँ किसानों को सालभर अपने मवेशियों के लिए बड़े पैमाने पर पैरा की जरुरत होती है, इसीलिए यहाँ के किसान अपने खेतों के पैरा को सहेजने के साथ साथ आसपास गाँव के खेतों की पराली को एकत्रित करते हैं, वहीं बहेराडीह में कई ऐसे किसान भी हैं, जो पैरा अर्थात पराली को बड़े पैमाने पर एकत्रित करके मशीन से भूसी बनाकर जिले के कई गावों में सप्लाई करके लाखों रूपये का कारोबार करके अच्छा आमदनी ले रहे हैं।

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किसान स्कूल में किसानों को मिल रहा मशरूम उत्पादन का निःशुल्क प्रशिक्षण
बहेराडीह गांव में देश का पहला किसान स्कूल संचालित है, जहां पर किसानों को खेतों में पराली को जलाने के बजाय उससे मशरूम अर्थात पैरा पुटू उत्पादन और वेस्ट डी कम्पोजर का इस्तेमाल करके जैविक खाद बनाने को लेकर छत्तीसगढ़ के अलावा अन्य राज्यों के किसानों को वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव व उनकी टीम द्वारा निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है.

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