‘संस्था पर बोझ नहीं बनना चाहता…’, जस्टिस यशवंत वर्मा ने क्यों दिया इस्तीफा? पत्र में लिखी एक-एक बात

नई दिल्ली स्थित बंगले में जले हुए नोट मिलने के बाद चर्चित हुए न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने अंततः इस्तीफा दे दिया।

 



नोटों के जलने की घटना के साल भर बाद उन्होंने यह कदम उठाया है। अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेजा है। उसकी प्रतिलिपि भारत के मुख्य न्यायमूर्ति सूर्यकांत को भी भेजी है। यह इस्तीफा नौ अप्रैल 2026 की तिथि में भेजा गया है।

इस्तीफा पत्र में यशवंत वर्मा ने लिखी एक-एक बात
न्यायमूर्ति वर्मा ने अपने पत्र में कहा, ‘इस्तीफा देने के लिए मजबूर किए जाने वाले कारण की वजह से मैं इस संस्था पर बोझ नहीं बने रहना चाहता और गहरी पीड़ा की वजह से इस्तीफा दे रहा हूं।’

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उन्होंने महाभियोग की कार्यवाही शुरू होने के बाद इस्तीफा दे दिया है। कहा जा रहा है कि अब पार्लियामेंट्री कमिटी की इंक्वारी भी स्वत समाप्त हो जाएगी।

मार्च 2025 में आवास से मिले थे जले हुए नोट
दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति रहने के दौरान उनके दिल्ली स्थित आवास में मार्च 2025 में कथित तौर पर नकदी जलने के बाद उनका स्थानांतरण दिल्ली हाई कोर्ट से वापस इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया था। यहां भी उनके स्थानांतरण का जमकर विरोध हुआ था।

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इसका परिणाम यह हुआ था उन्हें केसों की सुनवाई से अलग रखा गया था। हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने विरोध किया था। फ़िलहाल आरोपों के संबंध में एक आंतरिक जांच लंबित बताई जाती है। इस मामले के सामने आने के बाद ही न्यायमूर्ति को इस्तीफा देने की सलाह दी गई थी।

महाभियोग के माध्यम से हटाए जाने पर सभी सुविधाओं से वंचित होना पड़ता। अब पूर्व न्यायमूर्ति को मिलने वाली सुविधाएं पेंशन अनुमन्य होंगी। वकालत भी कर सकेंगे।

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