Chhattisgarhi Kavi Sammelan : धार्मिक नगरी खरौद में ‘छत्तीसगढ़ी कवि सम्मेलन’ आयोजित, वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू की स्मृति में हुआ आयोजन

जांजगीर-चाम्पा. छग की काशी के नाम से विख्यात धार्मिक नगरी खरौद में लक्ष्मणेश्वर मंदिर के सामने ‘छत्तीसगढ़ी कवि सम्मेलन’ का आयोजन किया गया. वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू की स्मृति में आयोजित छत्तीसगढ़ी कवि सम्मेलन में छग के ख्यातिलब्ध कवि शामिल हुए. यहां रायपुर के वरिष्ठ कवि मीर अली मीर, अकलतरा के बंशीधर मिश्रा, जांजगीर के अरुण तिवारी, सीपता-बिलासपुर के शरद यादव अक्स, कोटा की सोमप्रभा नूर, मौहाडीह-बाराद्वार के कौशल दास महंत, रतनपुर के बालमूकुंद श्रीवास और खोखरा-जांजगीर के कवि अनुभव तिवारी के द्वारा शानदार प्रस्तुति दी गई.

 



इस दौरान छग गौ सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष राजेश्री महंत रामसुंदर दास, जिला पंचायत की सदस्य नेहा रामचन्द्र साहू, कांग्रेस नेता रविशेखर भारद्वाज, खरौद नगर पंचायत के अध्यक्ष गोविंद यादव, राहौद के पूर्व अध्यक्ष संतोष गुप्ता सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. यहां छात्र-छात्राओं के द्वारा भक्ति गीतों पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम की भी प्रस्तुति दी गई. इस दौरान खरौद नगर और क्षेत्र में ‘छत्तीसगढ़ी कवि सम्मेलन’ को लेकर लोगों में उत्साह देखने को मिला.

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आपको बता दें, धार्मिक नगरी खरौद, वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू की जन्मस्थली है और उनकी याद में हर साल ‘छत्तीसगढ़ी कवि सम्मेलन’ का आयोजन किया जाता है. छत्तीसगढ़ी को पहचान देने वाले कवियों की मौजूदगी में धार्मिक नगरी खरौद में कविता पाठ किया गया, वहीं हास्य कवियों ने लोगों को खूब गुदगुदाया.

छत्तीसगढ़ी कवि सम्मेलन में देशभक्ति, श्रृंगार और हास्य रस की गूंज सुनाई दी। युवा कवि अनुभव तिवारी ने अपनी देशभक्ति से ओतप्रोत पंक्तियों “तैं धरम पूछ के मारथस रे गोली, हम मरम जानके भर देथन जी झोली” से माहौल में जोश भर दिया और पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी।

रतनपुर से आए कवि बालमुकुंद श्रीवास ने भी पाकिस्तान को ललकारते हुए कहा,
“अब के अइसन वार करे हस, बदला तो लेके रइबो… लाहौर करांची लेके रइबो।”
उनकी पंक्तियों ने दर्शकों में जोश भर दिया।

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सीपत के शरद यादव जांजी ने अपनी संवेदनशील रचना से समाज सेवा का भाव जगा दिया।
“आज ले पुरखा लेवत हावय सुरता मा तोर नाव ला…”

वहीं मीर अली मीर की ने गुनवंतीन दाई मोर, धनवंतीन दाईं मोर
मइया पइया लागव तोर
भरे कटोरा धान के, तोर चरचा
रहय शोर के साथ ही नंदा जाही…रचना ने तालियों की गूंज बटोरी। श्रृंगार रस की कवियत्री सोमप्रभा नूर ने “कुलूप अमावस के रतिहा म दियना के उजियारि ए
सुरूज ला परघाए के खातिर होगे पोठ तियारी हे,
अकच्छर अकच्छर जेखर लिखना सत ईमान पठोइस जी
अईसन सुघड़ डहर बतईया बाबू कुंज बिहारी ए।” सुनाकर भाव विभोर कर दिया, तो हास्य कवि कौशल दास महंत ने ठहाकों से मंच को गूंजा दिया।

कवि अरुण तिवारी की प्रस्तुति “टीप टीप चूहे पानी” पर भी खूब वाहवाही मिली. कार्यक्रम का सफल संचालन हास्य कवि बंशीधर मिश्रा ने किया. कुल-मिलाकर कवि सम्मेलन में हर रस का रंग जमाया गया, लेकिन देशभक्ति की ललकार सबसे बुलंद रही.

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इस मौके पर रामलाल यादव, सुबोध शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव, नवाचारी कृषक रामाधार देवांगन, नगर पंचायत खरौद के उपाध्यक्ष महेश्वर यादव, त्यागी महाराज, सुखराम दास, निर्मल दास वैष्णव, अंकित जैन, पार्षद हरेकृष्ण साहू, ओमप्रकाश शर्मा, बसन्त देवांगन, कोमल साहू, रेशमलाल यादव, चंद्रकांत कश्यप, दिनेश भारद्वाज, जनक भारद्वाज, पुष्कर साहू, टालूराम साहू, मुरली नायर समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे.

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