BIG NEWS: दिग्गज भाजपा नेता और पूर्व मंत्री का निधन, लंबे समय से जूझ रहे थे कैंसर से, प्रदेश में शोक की लहर

आगरा. उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों से एक दुखद खबर सामने आई है। दरअसल प्रदेश के पूर्व मंत्री और दिग्ग्ज भाजपा नेता रामवीर उपाध्याय का देर रात निधन हो गया। बताया जा रहा है कि वे लंबे से कैंसर से जूझ रहे थे और कल देर रात उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।



बता दें कि रामवीर उपाध्याय को हाथरस की सियासत के पर्याय के तौर पर देखा जाता था।

मिली जानकारी के अनुसार रामवीर उपाध्याय लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। उनका उपचार लगातार चल रहा था। कल देर रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।

उनके निधन पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शोक व्यक्त किया है। केशव प्रसाद मौर्य ने ट्वीट कर लिखा है कि उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री श्री रामवीर उपाध्याय जी के आकस्मिक निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। ईश्वर उनकी आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोक संतृप्त परिवार एवं समर्थकों को इस असीम दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति

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बता दें कि लगभग 64 वर्षीय रामवीर उपाध्याय की गिनती कद्दावर नेताओं में होती थी। वे उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार के कैबिनेट मंत्री भी रहे थे। हालांकि बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था। वे लगभग 25 साल तक हाथरस की अलग-अलग सीटों से विधायक चुने गए थे।

रामवीर उपाध्याय की पत्नी सीमा उपाध्याय जिला पंचायत हाथरस की अध्यक्ष हैं। वह अपने पीछे एक बेटा और दो बेटियां छोड़ गए हैं। रामवीर उपाध्याय के भाई रामेश्वर ब्लॉक प्रमुख हैं। उनके एक और भाई मुकुल उपाध्याय पूर्व विधायक हैं।

प्रदेश के पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय बसपा की सरकार में चिकित्सा शिक्षा और परिवहन मंत्री भी रहे थे। उनका आगरा से गहरा जुड़ाव रहा। ब्राह्मण समाज में उनकी खासी पकड़ थी। वर्ष 2009 में उन्होंने पत्नी सीमा उपाध्याय को आगरा की फतेहपुरसीकरी लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा। वह राजबब्बर को हराकर चुनाव जीती थीं।

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मूलरूप से सादाबाद निवासी रामवीर उपाध्याय ने बसपा सरकार के दौरान ही आगरा को अपनी कर्मभूमि बना लिया था। उन्होंने शास्त्रीपुरम में आवास बनवाया। बसपा के कद्दावर नेता रहे रामवीर उपाध्याय का पार्टी से वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान मोहभंग हो गया था।

उनकी पत्नी सीमा उपाध्याय और भाई मुकुल उपाध्याय पहले ही भाजपा का दामन थाम चुके थे। विधानसभा चुनाव से पहले उनके पुत्र चिराग भी आगरा में ही भाजपा में शामिल हो गए। हाल के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें सादाबाद से चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन वह जीत नहीं सके।

आगरा समेत आसपास के जिलों में ब्राह्मण समाज के साथ ही सर्वसमाज में उनकी गहरी पैठ थी। यही कारण था कि भाजपा ने उन्हें न केवल पार्टी में शामिल किया बल्कि विधानसभा चुनाव में भी उतारा था। उनके निधन से जिले में शोक की लहर दौड़ गई।

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