Atiq Ahmed: अतीक ने 1979 में की थी पहली वारदात, 44 साल बाद 7 सेकेंड में ताबड़तोड़ फायर‍िंग और साम्राज्य खत्‍म…पढ़िए

प्रयागराज. Atiq Ahmed Murder 24 फरवरी के बाद महज 50 दिन ही गुजरे हैं। एक के बाद एक चार शूटर मारे गए। अतीक के बेटे असद को दो दिन पहले ही गुरुवार दोपहर एसटीएफ ने झांसी में शूटर गुलाम समेत ढेर किया था। शनिवार दिन में करीब साढ़े दस बजे असद को कसारी मसारी के पुश्तैनी कब्रिस्तान में दफन किया गया था। तमाम तरह की आशंकाओं और पुलिस चौकसी के बीच माहौल तनाव भरा था इसी बीच रात में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को भी काल्विन अस्पताल परिसर में अपराधियों ने गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया।



44 साल पहले चक‍िया में की थी पहली वारदात
1979 में चकिया में कत्ल की पहली वारदात के बाद अतीक अहमद ने अपराध का सिलसिला शुरू कर दिया था। वह एक के बाद अपराध अंजाम देता जा रहा था। उसके सामने कोई खड़ा होने वाला नहीं था। 1980 के दशक में चांद बाबा ने आतंक फैला रखा था। अतीक अहमद ने जब पैर पसारना शुरू किया तो चांद बाबा से उसका टकराव शुरू हो गया। चांद बाबा और अतीक के गिरोह के बीच अक्सर चाकू, पत्थर, बम चलने लगे थे।

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अतीक अहमद 1989 में पहली बार बना था व‍िधायक
आखिरकार 1989 में पहली बार विधायक का चुनाव चुने जाने के बाद अतीक अहमद ने अपनी बादशाहत कायम करने का प्रयास शुरू किया और आखिरकार चांद बाबा को भी रोशन बाग में मार गिराया।चांद बाबा के मारे जाने के बाद अतीक की खुलकर गुंडई शुरू कर दी थी। वह एक बाद एक कत्ल करता गया। रंगदारी उगाही, धमकी, जमीन पर कब्जा करना उसका रोज का काम हो गया था। जिसने भी आवाज उठाई, उसे मार दिया और शांत कर दिया। झलवा की सूरजजकली के पति को भी 12 बीघा जमीन हड़पने के लिए मार दिया था।

2005 में राजू पाल की हत्‍या कर यूपी पुल‍िस को दी थी खुली चुनौती
इन सबके बाद 2005 में राजू पाल हत्याकांड और गवाह उमेश पाल का अपहरण कर अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ ने यूपी पुलिस को खुलकर चुनौती दी। दोनों पकड़े और कुछ समय बाद छूटकर आ गए। राजू पाल हत्याकांड और उमेश पाल अपहरण कांड का मामला यूं ही चलता रहा। उमेश पाल मुकदमे की पैरवी करते रहे। इसी बीच 24 फरवरी को उमेश पाल और दो गनर को सुलेम सराय में जीटी रोड पर गोलियों से छलनी कर दिया गया। इस हत्याकांड के बाद पुलिस शूटरों की तलाश में लगी थी तभी एमपी-एमएलए अदालत ने उमेश पाल अपहरण कांड में अतीक अहमद को उम्र कैद की सजा सुना दी। अतीक और अशरफ को वापस जेल भेज दिया गया था।

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अतीक और अशरफ ने जताई थी खुद की हत्‍या की आशंका
पुलिस ने वापस वहां से लाने की अर्जी दी तो अतीक और अशरफ ने खुद की हत्या की आशंका जताई। बहरहाल, दोनों को साबरमती और बरेली जेल से प्रयागराज में नैनी जेल लाया गया। गुरुवार दोपहर अतीक और अशरफ को जब सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया था तभी झांसी में अतीक के बेटे असद और शूटर गुलाम को ढेर कर दिया गया। बेटे के मारे जाने के बाद अतीक और अशरफ गम में डूबे थे। उनके रोने की खबरें मीडिया में आ रही थी। शनिवार को अतीक के बेटे असद को दफन किया गया तब भी अतीक पुलिस कस्टडी में रो रहा था। और फिर रात में यह घटना जिसमें अतीक के माफियाराज का शूटरों ने अंत कर दिया।

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