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अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस 1 मई 2020 : मनरेगा से गांव में ही मिल रहा रोजगार, लॉकडाउन में 1 लाख 40 हजार मजदूरों को मिल रही आजीविका, महात्मा गांधी नरेगा की प्रतिदिन मजदूरी 190 रूपए

जांजगीर-चांपा. देश कोरोना कोविड-19 के प्रकोप से गुजर रहा है, संपूर्ण भारत में लॉकडाउन की स्थिति बनी हुई है। 1 मई 2020 को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस है। ऐसे में महामारी एवं लॉकडाउन के बीच भी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मजदूरों के लिए वरदान साबित हो रही है। जिले में 1 लाख 40 हजार मजदूरों को काम दिया जा रहा है।
जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी तीर्थराज अग्रवाल ने अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर सभी मजदूरों को बधाई देते हुए इस महामारी में सुरक्षित रहने कहा है। उन्होंने इस मौके पर कहा कि महात्मा गांधी नरेगा के तहत गांव में लगातार मजदूरी मूलक कार्य स्वीकृत किए जा रहे हैं, ताकि मजदूरों को किसी तरह की कोई परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के मुश्किल हालात के बीच शासन के सुरक्षा को लेकर दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए श्रमिक काम कर रहे हैं। कार्यस्थल पर मास्क लगाकर मनरेगा के मजदूर काम कर रहे है और साबुन, सैनिटाइजर, हैंडवाश आदि से लगातार हाथ भी धो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि ग्रामीण क्षेत्रों के परिवारों की आजीविका सुरक्षा, प्रत्येक परिवार के अकुशल मजदूरी करने वाले इच्छुक वयस्क सदस्य को केन्द्र सरकार से प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 100 दिन एवं राज्य सरकार से 50 दिवस का गारंटीशुदा रोजगार मुहैया कराया जा रहा है। वर्तमान में जिस तरह के हालात निर्मित हैं, ऐसे में मनरेगा श्रमिकों के लिए वरदान साबित हो रहा है। मनरेगा श्रमिकों को काम करने के एवज में 1 अप्रैल 2020 से प्रतिदिवस 190 रूपए की मजदूरी प्रदान की जा रही है। उन्होंने बताया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन श्रमिकों, ग्रामीणों के हितों में किया जा रहा है। महात्मा गांधी नरेगा जहां ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध करा रही है। वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से श्रमिकों, मजदूरों को पक्के आवास भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसी तरह राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्व सहायता समूह की महिलाओं को मजबूती के साथ स्वरोजगार की ओर बढ़ाया जा रहा है।

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