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7th Pay Commission : एक करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, सैलरी में होगा 90 हजार का इजाफा

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महंगाई भत्ता (Dearness allowance) ऐसा पैसा है, जो सरकारी कर्मचारियों को उनके रहने-खाने के स्तर (Cost of Living) को बेहतर बनाने के लिए दिया जाता है.

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. दिवाली के आसपास या फिर नवंबर में उनकी सैलरी में बड़ा इजाफा होगा. इसका फायदा 1 करोड़ से ज्‍यादा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स (Pensioners) को मिलेगा. सरकार नवंबर महीने में केंद्रीय कर्मचारियों (Central government employees) के महंगाई भत्‍ते (Dearness Allowance) में बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती है. जुलाई-अगस्त में AICPI आंकड़ों में उछाल आने से DA बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है. Labor ministry महंगाई भत्‍ते के आंकड़े जारी हो चुके हैं. अभी कर्मचारियों को 28 फीसदी महंगाई भत्‍ता मिल रहा है. आने वाले दिनों में इसमें तेजी आएगी.

31 फीसदी तक पहुंचेगा Dearness allowance
Labor Ministry के मुताबिक, अगस्त 2021 में All India Consumer Price Index for Industrial Workers (AI CPI-IW) में बढ़ोतरी हुई है. इससे यह बढ़कर 123 पर पहुंच चुका है. अभी सितंबर के आंकड़े आने हैं. इससे कर्मचारियों का DA 28 फीसदी से बढ़कर 31 फीसदी होना तय माना जा रहा है. इसका सीधा फायदा कर्मचारियों को दिवाली के आसपास होगा. हालांकि, इसका फायदा अगले महीने से न मिले. लेकिन, ऐलान हो सकता है.

90 हजार रुपए तक बढ़ेगी सैलरी
सरकार ने अभी तक एरियर को लेकर स्थिति साफ नहीं की है. ऐसे में अगर नवंबर में 3 फीसदी DA का ऐलान होता है तो निश्चित तौर पर राहत की बात है. अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 30 हजार रुपए महीना है तो इससे उसकी तनख्‍वाह 900 रुपए महीना बढ़ेगा. सालाना आधार पर देखें तो सीधे उनकी ग्रॉस सैलरी में 10,800 रुपए बढ़ जाएंगे. कैबिनेट सचिव स्‍तर के अफसरों की सैलरी 7500 रुपए महीना बढ़ेगी. मतलब, जिनकी बेसिक सबसे ज्‍यादा ढाई लाख रुपए महीना होती है, उन्हें सालाना आधार पर 90 हजार रुपए का फायदा होगा.

क्‍या होता है महंगाई भत्‍ता ?
महंगाई भत्ता (Dearness allowance) ऐसा पैसा है, जो सरकारी कर्मचारियों को उनके रहने-खाने के स्तर (Cost of Living) को बेहतर बनाने के लिए दिया जाता है. ये पैसा इसलिए दिया जाता है, ताकि महंगाई बढ़ने के बाद भी कर्मचारी के रहन-सहन के स्तर में कोई फर्क न पड़े. ये पैसा सरकारी कर्मचारियों, पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों और पेंशनधारकों को दिया जाता है.

इसकी शुरुआत दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान हुई थी. उस वक्त सिपाहियों को खाने और दूसरी सुविधाओं के लिए तनख्वाह से अलग यह पैसा दिया जाता था. उस वक्त इसे खाद्य महंगाई भत्ता या डियरनेस फूड अलाउंस (Dearness food allowance) कहते थे. भारत में मुंबई से 1972 में सबसे पहले महंगाई भत्ते की शुरुआत हुई थी. इसके बाद केंद्र सरकार सभी सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता दिया जाने लगा.

हर 6 महीने में होता है बदलाव
डियरनेस अलाउंस (Dearness allowance) कर्मचारियों के रहने-खाने के स्तर को बेहतर बनाने के लिए दिया जाता है. यह भत्ता सरकारी कर्मचारियों, पेंशनधारकों और पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों को दिया जाता है. महंगाई भत्ता इसलिए दिया जाता है कि महंगाई बढ़ने के बाद भी कर्मचारियों को अपना जीवन-यापन करने में कोई परेशानी न हो. आमतौर पर हर 6 महीने, जनवरी और जुलाई में Dearness Allowance में बदलाव किया जाता है.


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