Kharod News : नारी शक्ति संगठन ने ठाना, ‘धार्मिक नगरी खरौद में हो नशाबंदी’, महिलाओं की जागरूकता का दिखा चौतरफा असर, शराब और गांजा बेचने वालों ने महिलाओं की जागरूकता के आगे घुंटने टेके

जांजगीर-चाम्पा. छग की काशी के नाम से विख्यात धार्मिक नगरी खरौद में नारी शक्ति संगठन बनाकर महिलाओं ने ऐसा कुछ दिया है कि पुरुषों ने दांतों तले उंगली दबा लिया है. घर की चार दीवारी से निकलकर महिलाओं ने नशाबंदी का अभियान चलाया और आज महिलाओं की कोशिश ने रंग लाया है. महिलाओं के प्रयास से धार्मिक नगरी खरौद, नशाबंदी की कगार पर है. शराब और गांजा बेचने वालों ने महिलाओं की जागरूकता के आगे घुंटने टेक दिए हैं.



नगर पंचायत खरौद के नारी शक्ति संगठन की महिलाओं ने धार्मिक नगरी खरौद में 100 फीसदी नशाबंदी का अभियान छेड़ा है. खरौद के मांझापारा की महिलाओं ने नशाबंदी को लेकर अलख जगाई, फिर नारी शक्ति संगठन में महिलाओं का कारवां बढ़ता गया. आज बड़ी संख्या में महिलाओं ने नशाबंदी अभियान को समर्थन दे दिया है और नशाबंदी अभियान से जुड़ गई हैं. इन महिलाओं की कोशिश को देखकर खरौद की अन्य महिलाएं भी जुड़ रही हैं.

खरौद के नारी शक्ति संगठन की महिलाएं, शाम होने के पहले मांझापारा में इकट्ठा होती हैं. बैठक करती हैं, फिर मां महामाया के दर्शन कर नशाबंदी अभियान में निकलती हैं. हाथ में लाठी, सिर में टोपी पहनकर जब सिटी बजाती ये महिलाएं गलियों में निकलती हैं तो लोगों को पता चल जाता है कि नारी शक्ति संगठन की महिलाओं की टोली मोहल्ले में पहुंच गई है.
इस दौरान महिलाओं के द्वारा ‘फूल नहीं चिंगारी है, हम खरौद की नारी हैं’ का नारा लगाया जाता है और यह नारा गलियों में गूंजता है. रास्ते और गलियों में मिलने वाले लोगों को महिलाओं के द्वारा नशाखोरी के नुकसान को बताया जाता है और धार्मिक नगरी खरौद में चलाए जा रहे नशाबंदी अभियान से जुड़ने का आव्हान किया जाता है, वहीं महिलाओं से भी नारी शक्ति संगठन से जुड़ने की बात कही जाती है. पिछले 1 साल से नारी शक्ति संगठन की महिलाओं के द्वारा खरौद में यह प्रयास किया जा रहा है. मांझापारा से नशाबंदी का जो अलख जगा, वह आज खरौद के हर मोहल्ले तिवारीपारा, भड़ेरियापारा, जरहापारा और शुकुलपारा की हर गलियों में पहुंच गया है.

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वैसे तो छग सरकार ने बरसों पहले धार्मिक नगरी खरौद में शराब समेत अन्य अन्य नशे की सामग्री बिकने पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन यह कागजों तक ही सीमित रहा. खरौद की गली-गली में शराब और गांजा की बिक्री होती थी और महिलाओं को परेशानी होती थी. बच्चे भी नशाखोरी से प्रभावित हो रहे थे. इस तरह खरौद के बिगड़ते हालात और रोज-रोज के झगड़े, बढ़ते अपराध को देखकर महिलाओं ने ठाना कि खरौद में नशाबंदी किया जाए.

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मांझापारा की महिलाओं ने एक-एक महिलाओं को नारी शक्ति संगठन से जोड़ना शुरू किया, फिर इसका प्रभाव दिखना शुरू हुआ. महिलाओं को शराब माफिया ने धमकी भी दी, लेकिन अपने कर्म पथ पर अडिग इरादे के साथ महिलाएं आगे बढ़ीं. महिलाओं के नशाबंदी अभियान को महिलाओं के साथ लोगों का समर्थन मिला और महिलाएं, आगे बढ़ती गई.

महिलाओं की कोशिश को देखते हुए नगर पंचायत के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और पार्षदों ने भी आगे बढ़कर साथ देने का फैसला लिया है. खास बात यह है कि महिला पार्षद, पहले से ही नारी शक्ति संगठन से जुड़कर नशाबंदी की दिशा में काम कर रही हैं. महिलाओं को अब बड़े स्तर पर समर्थन मिला है. शुरुआत में पुलिस का सपोर्ट नहीं मिला था, लेकिन जब महिलाओं के द्वारा लगातार नशाबंदी की दिशा में काम किया गया तो पुलिस ने महिलाओं को लाठी, टोपी, सिटी और आईडी कार्ड उपलब्ध कराया. महिलाओं ने अपने दम और अपनी हिम्मत से धार्मिक नगरी खरौद को नशाबंदी की कगार पर ले आया है.

आसपास गांवों से खरौद में पहुंचती है शराब स्थानीय लोगों का कहना है कि खरौद में आसपास गांवों से शराब पहुंचती है. पुलिस और आबकारी विभाग को इसी दिशा में कार्रवाई की आवश्यकता है. वैसे, महिलाओं ने खरौद में ऐसा माहौल बना दिया है कि शराब बनाने और बेचने वालों में हड़कम्प है. 

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महिलाओं की मानें तो अभी खरौद में 75-80 फीसदी तक नशाबंदी हो गई है. खरौद में कुछ लोग, दूसरे गांव से शराब लाकर बेचते हैं. ऐसे लोगों पर भी महिलाओं ने अपनी जागरूकता से लगाम लगाई है और पुलिस से पकड़वा कर जेल भिजवा दिया है. इस तरह खरौद में नारी शक्ति की कोशिश से नशाखोरी पर लगाम लग रही है. महिलाओं का कहना है कि धार्मिक नगरी में 100 फीसदी नशाबंदी का लक्ष्य है और वे इस राह पर डटी हैं. वे हर हाल में खरौद में शराबंदी कराकर रहेंगी.

 

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