



नई दिल्ली. क्या आपको भी दिन भर की थकान मिटाने के लिए टीवी के सामने घंटों बैठना पसंद है? अगर हां, तो यह खबर आपके लिए एक चेतावनी भी है और एक अच्छी सलाह भी। हम अक्सर मनोरंजन के लिए टीवी का सहारा लेते हैं, लेकिन एक नए अध्ययन ने खुलासा किया है कि यही आदत आपकी मेंटल हेल्थ की दुश्मन बन सकती है। हालांकि, घबराएं नहीं क्योंकि समाधान बहुत आसान है। आइए, इस आर्टिकल में डिटेल में इसके बारे में जानते हैं।
एक गंभीर वैश्विक समस्या है डिप्रेशन
डिप्रेशन केवल उदास महसूस करना नहीं है; यह एक गंभीर मानसिक विकार है जो हमारे सोचने, महसूस करने और दुनिया को देखने के नजरिए को बदल देता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार: दुनिया की लगभग 4% आबादी डिप्रेशन का शिकार है।
वयस्कों में यह आंकड़ा 5.7% है (पुरुषों में 4.6% और महिलाओं में 6.9%)
70 वर्ष से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों में यह 5.9% है
इसका मतलब है कि दुनिया भर में करीब 33 करोड़ 20 लाख लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। हालांकि, अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन का कहना है कि डिप्रेशन का इलाज पूरी तरह संभव है, और अब विज्ञान ने इसे रोकने का एक आसान तरीका भी खोज लिया है।
क्या कहती है नई रिसर्च?
‘यूरोपियन साइकियाट्री’ में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन के मुताबिक, टीवी देखने के समय को कम करके उस समय को अन्य एक्टिविटीज में लगाने से ‘मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर’ को रोका जा सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिंगन की प्रमुख शोधकर्ता रोजा पालाजुएलोस- gonzalez और उनकी टीम ने इस अध्ययन के लिए 65,000 से ज्यादा वयस्कों पर शोध किया।
शोध की शुरुआत में इनमें से किसी को भी डिप्रेशन नहीं था। इन लोगों पर 4 साल तक नजर रखी गई और देखा गया कि वे टीवी देखने के अलावा एक्सरसाइज, नींद या घर के काम जैसी एक्टिविटीज में कितना समय बिताते हैं।
मिडल ऐज ग्रुप के लोगों के लिए खुशखबरी
शोधकर्ताओं ने पाया कि टीवी का समय कम करने का सबसे ज्यादा फायदा मिडल ऐज ग्रुप के लोगों को होता है। आंकड़े बताते हैं:
अगर आप रोजाना टीवी देखने के समय में से 1 घंटा कम कर दें और कुछ और काम करें, तो डिप्रेशन का खतरा 18.78% कम हो जाता है।
अगर आप इसे डेढ़ घंटा कम करते हैं, तो खतरा 29% घट जाता है।
सबसे चौंकाने वाला परिणाम तब दिखा जब लोगों ने टीवी का समय 2 घंटे कम किया, इससे डिप्रेशन के जोखिम में 43% की भारी गिरावट देखी गई।
टीवी बंद करके क्या करें?
सिर्फ टीवी बंद करना ही काफी नहीं है, उस समय का सही इस्तेमाल करना भी जरूरी है। शोध में पाया गया कि टीवी के बदले स्पोर्ट्स को चुनने से सबसे ज्यादा फायदा होता है।
खेलकूद: केवल 30 मिनट खेल खेलने से खतरा 18% कम हो जाता है।
काम या स्कूल में फिजिकल एक्टिविटी: इससे खतरा 10.21% कम होता है।
नींद: अच्छी नींद लेने से भी खतरा 9% घटता है।
घूमना-फिरना: इससे जोखिम में 8% की कमी आती है।
बता दें, शोध में एक अपवाद भी मिला। जी हां, टीवी का समय कम करके अगर आप केवल घर के काम करते हैं, तो डिप्रेशन के खतरे में कोई खास कमी नहीं आती है।
इस स्टडी का मैसेज साफ है कि टीवी के सामने घंटों बैठने के बजाय, उस समय का यूज एक्टिव रहने, खेलने या अच्छी नींद लेने में करें। खासकर मिडल ऐज के लोगों के लिए यह बदलाव उनकी मेंटल हेल्थ के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।





