Janjgir-Baloda News : हमर आंगनबाड़ी, हमर अभिमान, आंगनबाड़ी शिक्षिका कॉन्फ्रेंस सम्पन्न, बच्चों के सर्वांगीण विकास पर हुआ मंथन

जांजगीर-चाम्पा. एकीकृत बाल विकास परियोजना, बलौदा एवं अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में बलौदा में आंगनवाड़ी शिक्षिकाओं का एक दिवसीय कॉन्फ्रेंस आयोजित किया गया। “हमर आंगनबाड़ी, हमर अभिमान” थीम पर आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के समग्र विकास से जुड़े अनुभवों को साझा करना, शिक्षिकाओं के नवाचारों को सामने लाना तथा सीखने-सिखाने के बेहतर वातावरण पर सामूहिक मंथन करना था।

 



कॉन्फ्रेंस में बाल विकास के सर्वांगीण विकास की खेल आधारित गतिविधियों को केंद्र में रखते हुए कुल नौ आंगनवाड़ी शिक्षिकाओं ने अपने अनुभवों और कार्यों की विस्तृत प्रस्तुति दी। इस दौरान 60 से अधिक आंगनवाड़ी शिक्षिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शिक्षिकाओं ने साझा किया कि बच्चों के साथ नियमित रूप से गतिविधि आधारित कार्य करने से वे बहुत ही सहज और आनंदपूर्ण तरीके से सीखते हैं तथा उनका समग्र विकास संभव हो पाता है।

कार्यक्रम की शुरुआत मॉडल आंगनवाड़ी केंद्र के अवलोकन एवं गैलरी भ्रमण से हुई। इस अवसर पर परियोजना अधिकारी जया पटेल ने मॉडल आंगनवाड़ी की व्यवस्था और शिक्षण वातावरण का निरीक्षण किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी शिक्षिकाएँ समाज की मजबूत नींव हैं, जिनके कंधों पर देश के भविष्य का निर्माण टिका है। उन्होंने कहा कि शिक्षिकाएँ अपनी जिम्मेदारियों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए बच्चों के जीवन की मजबूत आधारशिला तैयार कर रही हैं।
कार्यक्रम के प्रारंभ में लक्ष्मी तिवारी ने बालगीत प्रस्तुत कर पूरे वातावरण को उत्साह और ऊर्जा से भर दिया। इसके बाद गायत्री वैष्णव और गायत्री कंवर ने संयुक्त रूप से “एक घंटा खेल आधारित गतिविधियाँ” विषय पर अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि छोटे बच्चे खेल के माध्यम से बहुत तेजी से सीखते हैं और खेल आधारित गतिविधियाँ बच्चों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

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पितर पटेल और सूरज देवी ने “सर्कल टाइम और बातचीत” विषय पर अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि बच्चों से नियमित संवाद उनके शब्द भंडार को बढ़ाने के साथ-साथ उनकी अभिव्यक्ति क्षमता और कल्पनाशक्ति को भी विकसित करता है। आंगनवाड़ी केंद्रों में जब बच्चों को खुलकर अपनी बात रखने का अवसर मिलता है, तो वे अधिक आत्मविश्वास के साथ सीखने की प्रक्रिया में भाग लेते हैं।

आस्था सिंह ने कहानी के माध्यम से बच्चों में भाषा विकास और कल्पनाशक्ति के विस्तार के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कहानियाँ बच्चों को मौखिक भाषा से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम हैं और इनके माध्यम से बच्चों में रचनात्मक सोच तथा संवेदनशीलता का विकास होता है। कमला बिंझवार ने बच्चों में रचनात्मक विकास कैसे होता है और केंद्र में कौन कौन सी विविध गतिविधियां कराई जाए, जिससे बच्चों में रचनात्मकता लाई जा सकती है।

सरिता पटेल और सरस्वती मिरी ने आंगनवाड़ी केंद्रों से समुदाय के बेहतर जुड़ाव और बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के उपायों पर ईसीसीई दिवस और सुपोषण चौपाल जैसे विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि जब समुदाय की सक्रिय भागीदारी होती है, तो आंगनवाड़ी केंद्रों की गतिविधियाँ और अधिक प्रभावी एवं परिणामकारी बनती हैं। अंत में गायत्री सूर्यवंशी द्वारा ‘आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों की संख्या कैसे बढ़ी?’ इस विषय पर अपने केंद्र के अनुभवों को रखते हुए सभी प्रतिभागियों को बच्चों की संख्या बढ़ाने के विविध तरीकों पर दृष्टि प्रदान की।
कॉन्फ्रेंस के दौरान बच्चों के कार्यों से समृद्ध “प्रिंट रिच” वातावरण के महत्व पर भी विशेष चर्चा हुई। शिक्षिकाओं ने बताया कि रंग-बिरंगे पोस्टर, चित्रों और अक्षरों से सजी दीवारें बच्चों के लिए सीखने का जीवंत माध्यम बन जाती हैं। छोटे बच्चे चित्रों के माध्यम से शब्दों और अक्षरों को आसानी से पहचानना सीखते हैं।

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शिक्षिकाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब कोई बच्चा अपने नन्हें हाथों से कागज पर अपनी कल्पना को उकेरता है और पहली बार किसी अक्षर को पहचानता है, तो वह क्षण उनके लिए अत्यंत भावुक और अविस्मरणीय बन जाता है। उन्होंने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों को केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि उन्हें समाज में रहने की कला, अनुशासन और सहयोग जैसे जीवन मूल्यों से भी परिचित कराते हैं।
कार्यक्रम के अंतिम सत्र में बच्चों के नैतिक विकास पर चर्चा हुई। इसमें ईमानदारी, अनुशासन, सहयोग, एक-दूसरे का सम्मान तथा अपनी बारी का इंतजार करना, अच्छी आदतें जैसे मूल्यों को बच्चों में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। शिक्षिकाओं ने कहा कि एक अच्छे नागरिक बनने की पहली सीढ़ी आंगनवाड़ी से ही शुरू होती है।

समापन अवसर पर परियोजना अधिकारी ने कहा कि प्रिंट रिच वातावरण के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों की दीवारें भी बच्चों के लिए सीखने का माध्यम बन जाती हैं। जब बच्चे और दीवारें मिलकर बोलती हैं, तो आंगनवाड़ी का वातावरण सीखने-सिखाने के लिए अत्यंत प्रेरक और प्रभावी बन जाता है।
यह पूरा कार्यक्रम जिला परियोजना अधिकारी अनीता अग्रवाल के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। सम्मेलन के अंत में अपनी प्रस्तुति देने वाली सभी शिक्षिकाओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। परियोजना की सभी सेक्टर पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में कार्यक्रम का सफल आयोजन हुआ। इस कॉन्फ्रेंस में पैनलिस्ट के रूप लता ठाकुर, सेक्टर पर्यवेक्षक, बलौदा ग्रामीण सेक्टर, अलकिन शिक्षिका, अकलतरा विकासखंड, इति शर्मा, अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन का विशेष सहयोग रहा। जहां उन्होंने प्रत्येक प्रस्तुती की सराहना और समीक्षा की।
आंगनवाड़ी शिक्षिकाओं ने बताया कि इस प्रकार का कॉन्फ्रेंस उनके लिए पहला अनुभव था। यह कॉन्फ्रेंस न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि इससे उनके भीतर नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और अपने कार्य के प्रति गर्व की भावना भी मजबूत हुई।

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