सक्ती. नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर अग्रवाल जयपुरिया परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् गया श्राद्ध भागवत कथा का श्रवण करने पहुंचे. जहां उन्होंने व्यासपीठ कथावाचक अनिरुद्ध आचार्य का शाल श्रीफल भेंट कर उनका सम्मान कर आशीर्वाद प्राप्त किया व्यास पीठ से अनिरुद्ध आचार्य जी ने प्रसंग: कथा के अंतिम दिन कृष्ण की विभिन्न लीलाओं, सुदामा चरित्र और मित्रता के आदर्श प्रसंग का रसपान भगवत प्रेमियों को कथा श्रवण कराया कराते हुए बताया.








बाल्यकाल में मित्र सुदामा और श्री कृष्ण सांदीपनि ऋषि के आश्रम में एक साथ शिक्षा ग्रहण करते थे. अत्यंत गरीबी: शिक्षा के बाद सुदामा का जीवन अत्यंत गरीबी में बीता.वे भिक्षा मांगकर अपना और अपने परिवार का पेट भरते थे. सुदामा जी की पत्नी अनेकों बार करती थी आप अत्यंत गरीब हैं और आपके मित्र द्वारका देश है आप अपने मित्र से सहयोग ले लें जिससे हमारी गरीबी दूर हो जाएगी परंतु सुदामा अपने मित्र के पास सहायता मांगने नहीं जा रहे थे परंतु पत्नी सुनीता के आग्रह पर सुदामा अपने मित्र कृष्ण से मिलने द्वारका जाने के लिए राजी हो गया, परंतु खाली हाथ कैसे जाऊंगा. जब कहा तो पत्नी सुनीता ने पड़ोसियों से चांवल मांग कर लाया और सुदामा जी को दिया सुदामा जी चावल की पोटली लेकर आखिरकार अपने द्वारकाधीश मित्र से मिलने के लिए निकल पड़े वे अपने साथ उपहार के रूप में पड़ोस से मांगकर लाए हुए चावलों की पोटली (तंदुल) ले गए थे द्वारका पहुंचकर अपने मित्र से मिलने के लिए महल के द्वार पर खड़े हुए द्वारपालो से उन्होंने अपने मित्र को सूचना देने के लिए द्वारपालों से कहा जिस पर द्वारपालों ने भगवान श्री कृष्ण को महल में जाकर ब्राह्मण के द्वारा बताए गए मित्रता की बात कहते हुए उन्होंने सुदामा के आने का समाचार दिया जैसे ही द्वारपालों ने भगवान श्री कृष्ण को सुदामा जी के आने का समाचार सुनाया तो भगवान द्वारकाधीश कृष्ण नंगे पैर ही अपने मित्र से मिलने दौड़े. उन्होंने सुदामा को गले से लगाया, और महल के अंदर लाकर उन्हें राजसिंहासन पर बैठाया और अपने आंसुओं से उनके चरण धोए। यह आज के युग के व्यक्तियों को संदेश है कि निःस्वार्थ प्रेम: कैसा होता है भगवान श्री कृष्णा ने जब सुदामा के कांख में छुपी हुई पोटली के बारे में सुदामा जी से पूछने और सुदामा की पोटली को छिपाने लगे तब भगवान श्री कृष्ण ने कहा भाभी ने जरूर हमारे लिए कुछ उपहार स्वरूप खाने का सामान भेजा है जिसे आप क्यों नहीं दे रहे हैं और स्वयं भगवान श्री कृष्णा पोटली को लेने लगे सुदामा ने संकोचवश चावल नहीं दिए, लेकिन कृष्ण ने खुद ही पोटली खोलकर चावल बड़े चाव से खाए. और अपने मित्र सुदामा जी को बिना कुछ मांगे ही भगवान ने सुदामा की गरीबी दूर कर दी और उनकी झोपड़ी की जगह भव्य महल बना दिया। प्रतिदिन भागवत कथा श्रवण करने हजारों की संख्या में महिला पुरुष भक्तगण शामिल होकर महा आरती भंडारी का प्रसाद ग्रहण कर पुण्य का लाभ ले रहे हैं कथा श्रवण करने जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती द्रोपती कीर्तन चंद्रा, कीर्तन चंद्रा सहित अन्य उनके मित्रगणों ने कथा श्रवण किया.



